Who is Amit Bhatnakar? मध्य प्रदेश के छतरपुर के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनाकर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। वह पिछले 18 दिन से केन बेतवा परियोजना के कारण विस्थापन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।

देशभर में लोग अंदोलन हो रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर संसद तक विरोध-प्रदर्शन जारी है। सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के आग्रह पर आज 26वे दिन अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। इसी बीच मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के कारण विस्थापन के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को खत्म कर दिया है। उन्होंने यह फैसला पुलिस और सरकार के कहने पर नहीं, बल्कि अपनी मां के कहने पर लिया है।

3 जुलाई को शुरू हुआ था छतरपुर में विरोध-प्रदर्शन

दरअसल, छतरपुर में 3 जुलाई को बाराना नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था। इसको लेकर इलाके के लोगों ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और मुआवजे के भुगतान में हो रही गड़बड़ियों को लेकर जांच की मांग करते हुए विरोध किया था। उनका आरोप था कि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। साथ ही आरोप था कि उन परिवारों के लिए उचित मुआवजा अभी तक नहीं मिला है जो इसके हकदार हैं। लेकिन छतरपुर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने बारिश और बरना नदी में बढ़ते जलस्तर का हवाला देते हुए 19 जुलाई को कुपी गांव में विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर दिया था। लेकिन अमित भटनागर की भूख हड़ताल जारी रखी थी।

मां की बात नहीं टाल सके अमित भटनागर

छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा कि अमित भटनागर ने नारियल पानी पीकर अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। प्रशासन उनसे किए वादों की जांच पड़ताल करते हुए उचित न्याय करेगा। फिलहाल उनको जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं अमित के भाई अंकित ने बताया कि जब भाई की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। इससे परिवार दुखी था। लेकिन हमारी मां ने भैया से भूख हड़ताल तोड़ने को कहा तो उन्होंने उनकी बात मानते हुए हड़ताल समाप्त कर ली।

कौन हैं अमित भटनागर

अमित भटनागर मूल रूप से मध्य प्रदेश के छतरपुर में बिजावार के रहने वाले हैं। उनकी पहचान एक समााजिक कार्यकर्ता के रूप में होती है। साथ ही वह अपना एनजीओ भी चलाते हैं। हालांकि वह आम आदमी पार्टी से भी जुड़ चुके हैं। वह बुंदेलखड में जन-जंगल और जमीन के साथ किसानों के हित में आवाज उठाने के लिए जाने जाते हैं। छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना लिए भूख हड़ताल पर बैठे अमित इससे पहले भी कई बार सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन कर चुके हैं। इतना ही नहीं विरोध को लेकर वह कई बार जेल तक जा चुके हैं।

सोनम वांगचुक और अमित भटनाकर में क्या फर्क?

बता दें कि सोनम वांगचुक पिछले 26 दिन से नीट पेपर लीक के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर जंतर मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। लेकिन बीते दिन दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने उनकी तबीयत के चलते हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया था। आज सरकार के आग्रह पर उन्होंने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी है। वहीं मंध्य प्रदेश के छतरपुर में किसानों की हक की लड़ाई लड़ रहे अमित भटनागर ने भी आज अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। दोनों में यह फर्क है कि एक छात्रों के अधिकार के लिए आवाज उठा रहा था तो दूसरा किसानों की लड़ाई लड़ रहा था।