
इस्लामाबाद: पिछले साल भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल का कथित तौर पर निशाना बने पाकिस्तान के अहम 'नूर खान' एयरबेस पर मरम्मत का काम लगभग खत्म हो गया है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान भविष्य में भारत की तरफ से होने वाले किसी भी हमले से बचने के लिए यह तैयारी कर रहा है। इस बार पाकिस्तान नूर खान एयरबेस को और भी आधुनिक सिस्टम के साथ डेवलप कर रहा है।
जियो-इंटेलिजेंस एक्सपर्ट डेमियन साइमन ने हाल ही में कुछ सैटेलाइट तस्वीरें शेयर की हैं, जिनसे नूर खान एयरबेस की असलियत सामने आई है। इन तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि एयरबेस पर विमानों को रखने के लिए नए हैंगर बनाए जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक सामान्य मरम्मत नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों को भारत के आधुनिक निगरानी सिस्टम और सैटेलाइट की नजरों से छिपाना है।
कहा जाता है कि भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था, जिसमें पाकिस्तान के 11 प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस्लामाबाद से सिर्फ 25 किलोमीटर दूर नूर खान एयरबेस पर हुआ हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था। इस मिसाइल हमले के बाद ही पाकिस्तान नरम पड़ गया था और उसने युद्धविराम की अपील की थी।
रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन के मुताबिक, ईरान संघर्ष के बाद दुनिया को ड्रोन युद्ध की गंभीरता का एहसास हुआ है। स्वार्म ड्रोन (एक साथ झुंड में हमला करने वाले ड्रोन) के इस दौर में कोई भी देश अपने लड़ाकू विमानों को खुले में पार्क करने का जोखिम नहीं उठा सकता। माना जा रहा है कि भारत की सटीक ड्रोन हमला करने की क्षमता से पाकिस्तान डरा हुआ है और अपने विमानों को बचाने के लिए सुरक्षित हैंगर बना रहा है।
इस एयरबेस को पहले 'चклала बेस' के नाम से जाना जाता था। यह पाकिस्तान के लिए एक बेहद रणनीतिक ठिकाना है। इस्लामाबाद के करीब होने की वजह से यह सैन्य और कूटनीतिक आवाजाही का मुख्य गेटवे है। पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को कंट्रोल करने वाला 'स्ट्रैटेजिक प्लान डिवीजन' (SPD) और पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय (GHQ) भी इसी एयरबेस के पास हैं। C-130 हरक्यूलिस और IL-78 जैसे बड़े विमानों और फ्यूल भरने वाले टैंकरों के ऑपरेशन के लिए यह एक बड़ा सेंटर है।
हाल ही में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वान्स ईरान शांति वार्ता के लिए इसी एयरबेस पर उतरे थे। अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियानों के दौरान भी इस बेस ने एक अहम भूमिका निभाई थी। कुल मिलाकर, सैटेलाइट तस्वीरों से यह साफ है कि भारत की तकनीकी ताकत और सटीक हमला करने की क्षमता से डरकर पाकिस्तान अब अपनी सबसे कीमती सैन्य संपत्तियों को बचाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है।
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