Paper Leak Bill 2026 FAQ: किसे होगी जेल? कितना जुर्माना? किन परीक्षाओं पर होगा लागू? जानिए 10 बड़े सवालों के जवाब

Published : Jul 27, 2026, 07:33 PM IST
Anti-Paper Leak Bill 2026

सार

Anti-Paper Leak Bill 2026 FAQ: नए एंटी पेपर लीक कानून में किसे होगी जेल, कितना जुर्माना लगेगा, किन परीक्षाओं पर लागू होगा और AI से चीटिंग पर क्या नियम हैं? जानिए 10 बड़े सवालों के जवाब।

Paper Leak Law 2026 FAQ: देशभर में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली से परेशान छात्रों के लिए केंद्र सरकार एक बेहद सख्त कानून लेकर आ रही है। 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' को सोमवार को संसद में पेश किया गया। विपक्ष और सरकार के बीच बनी सहमति के बाद 28 जुलाई को दोपहर 12 बजे से इस बिल पर संसद में चर्चा और वोटिंग होने की उम्मीद है। यह कानून 2024 के पुराने कानून के मुकाबले कहीं ज्यादा सख्त है। इसमें सजा बढ़ाने से लेकर AI से चीटिंग, फास्ट ट्रैक कोर्ट और जांच की तय समय-सीमा तक कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। आइए 10 जरूरी सवालों (FAQs) से समझते हैं कि इस नए कानून से क्या-क्या बदलेगा, यह छात्रों और नकल माफियाओं पर कैसे असर डालेगा...

नया Paper Leak Bill 2026 क्या है?

यह 2024 में बने पब्लिक एग्जामिनेशन कानून में संशोधन का प्रस्ताव है। इसका मकसद पेपर लीक, नकल, साइबर चीटिंग और संगठित परीक्षा घोटालों पर पहले से ज्यादा सख्त कार्रवाई करना है।

नए पेपर लीक बिल 2026 में किसे होगी जेल?

संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले, नकल माफिया, साइबर हैकर, परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले गिरोह और मामले में मिलीभगत करने वाले जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारी और संस्थाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।

एंटी लीक बिल 2026 के अनुसार अब कितनी सजा होगी और जुर्माना लगेगा?

नए संशोधन में सजा और जुर्माना दोनों बढ़ाने का प्रस्ताव है। सामान्य मामलों में जेल की अवधि बढ़ाई गई है। संगठित पेपर लीक गिरोहों को अधिकतम 10 साल तक जेल हो सकती है। ऐसे मामलों में ₹10 करोड़ तक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

क्या AI से चीटिंग करना भी अपराध होगा?

हां। बिल में AI की मदद से चीटिंग, परीक्षा सिस्टम हैक करना, डिजिटल तरीके से प्रश्नपत्र भेजना, साइबर फ्रॉड और इलेक्ट्रॉनिक छेड़छाड़ जैसे मामलों को भी अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है।

किन परीक्षाओं पर लागू होगा नया कानून?

यह कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों की ओर से आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। इनमें शामिल हैं..

UPSC

SSC

रेलवे भर्ती परीक्षाएं

बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं

NTA की परीक्षाएं

NEET

CUET

JEE

अन्य केंद्रीय भर्ती और प्रवेश परीक्षाएं

क्या अब पेपर लीक मामलों की जांच जल्दी पूरी होगी?

हां। प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक जांच 2 महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि मामलों में देरी न हो।

क्या अब पेपर लीक के केस सालों तक नहीं चलेगा?

सरकार चाहती है कि चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा हो। इसके लिए रोजाना सुनवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

क्या राज्य सरकारें भी फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगी?

हां। नए बिल के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार मिलेगा, ताकि पेपर लीक मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।

क्या सिर्फ आरोपियों पर कार्रवाई होगी या अधिकारियों पर भी?

नहीं। अगर जांच में किसी परीक्षा एजेंसी, तकनीकी सेवा देने वाली कंपनी, संस्थान या जिम्मेदार अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

शिक्षा मंत्रालय की जगह DoPT यह कानून क्यों ला रहा है?

यह कानून सिर्फ शिक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाले अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया है। UPSC, SSC, रेलवे और कई केंद्रीय भर्ती परीक्षाओं की जिम्मेदारी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के पास होती है। इसलिए यही विभाग इस कानून और उसके संशोधन को संभाल रहा है। यही कारण है कि DoPT के प्रभारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह 2024 में यह कानून लाए थे और अब वही इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश कर रहे हैं।

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