
नई दिल्ली: एक महीने से सुलग रहा दिल्ली का जंतर-मंतर भले ही शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन वापसी के बाद शांत हो गया हो, लेकिन असली तूफान अभी आना बाकी है। वीकेंड की छुट्टी के बाद आज जब संसद की कार्यवाही शुरू होगी, तो माहौल बेहद हंगामेदार और टकराव से भरा होने की उम्मीद है। विपक्ष NEET-UG 2026 पेपर लीक, छात्रों पर हुई पुलिसिया बर्बरता और सरकार की घेराबंदी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच जंतर-मंतर की जो तस्वीरें सामने आईं, उसने देश की एक अलग ही हकीकत बयां की है।
शुरुआत में जंतर-मंतर सिर्फ NEET परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ छात्रों की आवाज था, लेकिन धीरे-धीरे यह जगह एक ऐसे राष्ट्रीय नोटिस-बोर्ड में तब्दील हो गई, जहाँ हर पीड़ित अपनी गुहार लेकर पहुंच रहा था। यहां हर कुछ मीटर पर मांगें और नारे पूरी तरह बदल रहे थे।
इस छात्र आंदोलन की सफलता को देखते हुए विपक्षी पार्टियों ने भी केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज करने का कोई मौका नहीं छोड़ा। जंतर-मंतर का मैदान राजनीतिक पैंतरेबाज़ी का अखाड़ा बन चुका था।
टॉल्स्टॉय मार्ग के पास का नजारा और भी हैरान करने वाला था। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI) की महिला शाखा, 'नेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन विमेन' (NFIW) की 54 वर्षीय महिला सदस्य के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं प्लेकार्ड लेकर खड़ी थीं।
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो चुका है और CJP का मंच हट चुका है, लेकिन जंतर-मंतर पर एक नई और बेहद खतरनाक चिंगारी सुलग रही है, जो सरकार की अगली सबसे बड़ी मुसीबत बन सकती है। यह मुद्दा छात्रों के भविष्य का नहीं, बल्कि वाहनों के ईंधन से जुड़ा है।
आज भले ही जंतर-मंतर पर सन्नाटा हो, लेकिन यह सन्नाटा किसी बड़े तूफान से पहले की शांति जैसा है। देखना होगा कि क्या विपक्ष संसद के भीतर इस अशांति को सरकार के लिए एक नए चक्रव्यूह में बदल पाता है या नहीं!
जंतर-मंतर पर विपक्षी दलों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में नजर आए।
विपक्ष की सक्रियता
#WATCH | Delhi | Opposition MPs, including Priyanka Gandhi, are protesting at Makar Dwar of Parliament, demanding accountability of the Union Home Minister for the July 20 incident during the CJP-led students' protest at Jantar Mantar pic.twitter.com/lzs6Yfh5iH
— ANI (@ANI) July 27, 2026
वीकेंड की छुट्टी के बाद संसद में कई संवेदनशील मुद्दे गूंज सकते हैं।
संभावित मुद्दे
पिछले कुछ सप्ताह की घटनाओं ने यह संकेत दिया कि जंतर-मंतर अब केवल किसी एक आंदोलन का स्थल नहीं रह गया है। छात्र, महिलाएं, दिव्यांग, राजनीतिक कार्यकर्ता, ट्रांसपोर्ट संगठन और सामाजिक समूह-सभी ने इसे अपनी आवाज उठाने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया। अब जब छात्र आंदोलन समाप्त हो चुका है, निगाहें इस बात पर हैं कि क्या E20 पेट्रोल का विवाद अगला बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन बन पाएगा, या फिर कोई नया मुद्दा देश की राजनीति और सड़कों दोनों पर नई बहस को जन्म देगा।
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