
Skyroot Aerospace: भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर ने एक ऐसा इतिहास रच दिया, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग के कुछ ही मिनट बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका को फोन कर बधाई दी। लेकिन इस बातचीत में आखिर ऐसा क्या कहा गया, जिसने इस मिशन को सिर्फ एक लॉन्च नहीं बल्कि भारत के भविष्य की नई उड़ान बना दिया?
काउंटडाउन सुचारू रूप से चल रहा था कि अचानक लिफ्ट-ऑफ से ठीक पहले एक इंटरनल होल्ड के कारण लॉन्च को रोकना पड़ा। कंट्रोल रूम में सन्नाटा पसर गया। वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था। क्या भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट इतिहास रचने से चूक जाएगा? लेकिन तभी, स्काईरूट एयरोस्पेस के युवा जांबाजों ने उस तकनीकी चुनौती को पछाड़ दिया। रॉकेट ने आग उगलते हुए आसमान का सीना चीर दिया। चारों स्टेज ने पहली ही कोशिश में वो कर दिखाया जिसकी कल्पना कई दिग्गजों ने नहीं की थी।
VIDEO | Sri Harikota, Andhra Pradesh: Prime Minister Narendra Modi (@narendramodi) congratulates Skyroot Aerospace over a telephone call after India's first privately developed orbital rocket, Vikram-1, successfully reaches orbit, completing its final burn and injecting payloads… pic.twitter.com/lctCsAwMtu
— Press Trust of India (@PTI_News) July 18, 2026
लॉंचिंग की इस हैरतअंगेज सफलता के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट के फाउंडर्स पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका को फोन घुमाया। पीएम ने कहा, "मैं इस मिशन पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए था। काश, मैं उस युवा टीम के साथ वहां मौजूद होता।" पीएम मोदी ने कहा कि जब स्पेस सेक्टर को प्राइवेट हाथों में सौंपने का फैसला लिया गया था, तब कई लोगों को शक था। लेकिन 25 से 30 साल के इन युवाओं ने आज उस शक की धज्जियां उड़ा दी हैं और साबित कर दिया कि भारत का प्राइवेट सेक्टर दुनिया पर राज करने के लिए तैयार है।
विक्रम-1 के सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट के दोनों फाउंडर्स से सीधे बात की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत के स्पेस सेक्टर में निजी कंपनियों को मौका देने के फैसले को सही साबित करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह पूरे मिशन पर लगातार नजर बनाए हुए थे और इच्छा थी कि लॉन्च के समय टीम के बीच मौजूद रहते। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की जमकर सराहना की।
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका से कहा कि उन्होंने केवल अंतरिक्ष में रॉकेट नहीं भेजा, बल्कि देश के युवाओं के सपनों की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि टीम के अधिकांश सदस्य 25 से 30 वर्ष की आयु के हैं, जो भारत के युवा इनोवेशन की ताकत को दर्शाता है।
Among the payloads on Vikram-1 Test Flight-1 is something truly special—a handwritten postcard from Hon’ble Prime Minister Shri @narendramodi with the words, “Vande Mataram.” 🇮🇳🚀
It travels to space alongside handwritten messages from our team, investors, policymakers, and… pic.twitter.com/sJajN6NiVJ— Skyroot Aerospace (@SkyrootA) July 17, 2026
'मिशन आगमन' केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं था। इस मिशन के साथ प्रधानमंत्री मोदी का हाथ से लिखा "वंदे मातरम्" पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष में भेजा गया। इसके साथ ISRO के वर्तमान और पूर्व चेयरमैन, भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों, वैज्ञानिकों, निवेशकों और स्काईरूट टीम के संदेश भी शामिल थे। यह भारत की अंतरिक्ष यात्रा को सम्मान देने का प्रतीकात्मक प्रयास था।
विक्रम-1 भारत का पहला सफल निजी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है। मिशन के दौरान चारों स्टेज ने पहली ही कोशिश में तय योजना के अनुसार काम किया और पेलोड को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ले जाती है, जहां निजी कंपनियां स्वतंत्र रूप से ऑर्बिटल रॉकेट डिजाइन, विकसित और लॉन्च करने में सक्षम हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर भी स्काईरूट की टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी भारत में इनोवेशन को नई दिशा दे रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि विक्रम-1 की सफलता देश के लाखों युवाओं को बड़े सपने देखने और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। विक्रम-1 की यह सफलता केवल एक लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
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