
नई दिल्ली: राजधानी के सियासी गलियारों में कल उस समय हलचल तेज़ हो गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक मंत्रिपरिषद की एक बेहद अहम और लंबी बैठक बुलाई। बंद कमरे में साढ़े चार घंटे तक चली इस मैराथन बैठक ने कई नए कयासों को जन्म दे दिया है। अगले महीने केंद्र में सरकार के शानदार 12 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन उत्सव के इस माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों को एक ऐसा कड़ा संदेश दिया है, जिसने पूरी कैबिनेट को अलर्ट मोड पर ला दिया है।
बैठक के भीतर क्या चल रहा था, इसे लेकर बाहर उत्सुकता चरम पर थी। सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर बाहर आई, उसने सबको चौंका दिया। पीएम मोदी ने कड़े लहजे में मंत्रियों से कहा, "अतीत में जो हुआ उसे भूल जाएं, भविष्य पर ध्यान दें।" प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे करने जा रही है। राजनीतिक पंडित इस बयान के गहरे मायने निकाल रहे हैं। क्या यह मंत्रियों के काम करने के ढर्रे को बदलने की आखिरी चेतावनी है या फिर किसी बड़े बदलाव का पूर्वाभ्यास?
इस उच्च-स्तरीय बैठक की टाइमिंग ने सबसे ज्यादा सस्पेंस पैदा किया है। 9 जून को मोदी सरकार के कुल 12 साल पूरे हो रहे हैं। ठीक इसी तारीख से पहले कयास लगाए जा रहे हैं कि कैबिनेट का बड़ा विस्तार या फेरबदल हो सकता है। साढ़े चार घंटे की इस बैठक में मंत्रियों की परफॉर्मेंस का भी अनौपचारिक रिव्यू हुआ। 11 महीने बाद हुई इस पूर्ण मंत्रिपरिषद की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में कुछ मंत्रियों की कुर्सी जा सकती है, तो कुछ नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि अब लचर रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने हर मंत्रालय को "विकसित भारत 2047" को अपना अंतिम लक्ष्य मानने का निर्देश दिया। पीएम ने कड़े शब्दों में कहा कि सुधार सिर्फ सरकारी फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं होने चाहिए, बल्कि वे जमीन पर दिखने चाहिए। उन्होंने नौकरशाही की देरी पर लगाम लगाने का आदेश देते हुए कहा कि फाइलें बिना किसी रुकावट के तेजी से आगे बढ़नी चाहिए। मंत्रियों को साफ कह दिया गया है कि वे अपने समय की उत्पादकता को अधिकतम करें।
बैठक के दौरान माहौल तब और गंभीर हो गया जब एक-एक करके 9 प्रमुख विभागों ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी विस्तृत प्रस्तुतियाँ (Presentations) देनी शुरू कीं। इनमें कृषि, श्रम, ऊर्जा, सड़क परिवहन और वाणिज्य जैसे भारी-भरकम मंत्रालय शामिल थे। इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मोर्चा संभाला और हाल ही में हुई पाँच-राष्ट्रों की सफल लेकिन बेहद संवेदनशील राजनयिक यात्रा के बारे में पूरी मंत्रिपरिषद को ब्रीफ किया।
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं ने भारत के सामने भी आर्थिक चुनौतियाँ खड़ी की हैं। सूत्रों का दावा है कि वैश्विक संकट के इस दौर में पीएम मोदी देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए आने वाले महीनों में कुछ बेहद कड़े और बड़े सुधार लागू करने वाले हैं। मंत्रियों को निर्देश दिया गया है कि वे सरकार की जन कल्याणकारी नीतियों को सीधे जनता के बीच लेकर जाएं। इस मैराथन बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि आने वाले दिन बेहद हलचल भरे होने वाले हैं।
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