15 साल की कानूनी लड़ाई के बाद, बॉम्बे हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के पायलट कबीर कपूर को न्याय दिया। कोर्ट ने DGCA द्वारा अवैध रूप से रद्द किए गए उनके लाइसेंस को तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है।

मुंबई: एक झूठे केस में फँसने के बाद 15 साल तक इंसाफ़ के लिए लड़ रहे एयर इंडिया के पायलट कैप्टन कबीर कपूर को आखिरकार बॉम्बे हाईकोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले से न्याय मिल गया है। कोर्ट ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) को उनका पायलट लाइसेंस तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। फैसले के बाद कबीर कपूर ने भावुक होकर कहा, "इन 15 सालों में मैंने अपना करियर, शादी और इज्जत सब कुछ खो दिया। लेकिन आखिरकार, मुझे मेरा खोया हुआ सम्मान वापस मिल गया है।"

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यह पूरा मामला अक्टूबर 2009 का है, जब कैप्टन कपूर दुबई से मुंबई की एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट उड़ा रहे थे। विमान के कॉकपिट में एक एयर होस्टेस के साथ उनकी बहस हो गई, जिसके बाद एयर होस्टेस ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। हालांकि, जांच में यह आरोप झूठा साबित हुआ।

लेकिन, इस विवाद के बाद DGCA ने उन पर 'विमान की सुरक्षा को खतरे में डालने' का एक नया आरोप लगाकर उनका पायलट लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया। लाइसेंस रद्द होते ही एयर इंडिया ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कानूनी लड़ाई लड़ने में उनकी सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई और वह गंभीर आर्थिक संकट में फँस गए। इस विवाद और करियर की तबाही का असर उनकी शादीशुदा जिंदगी पर भी पड़ा और आखिर में उनकी शादी भी टूट गई। समाज और दोस्तों ने भी उनसे दूरी बना ली।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने DGCA की कार्रवाई को पूरी तरह से मनमाना और गैर-कानूनी माना। जस्टिस ए.एस. चंदूरकर और जी.ए. सनप की बेंच ने साफ कहा कि DGCA के पास किसी पायलट की अनुशासनहीनता के लिए उसका लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने जैसी कड़ी सजा देने का कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह प्राकृतिक न्याय का घोर उल्लंघन है, क्योंकि पायलट को अपना पक्ष रखने का सही मौका दिए बिना ही उनका करियर खत्म कर दिया गया।

15 साल बाद लाइसेंस वापस तो मिल गया है, लेकिन इतने लंबे समय तक विमान न उड़ाने की वजह से कपूर को अब कड़ी री-ट्रेनिंग प्रक्रियाओं और फ्लाइट टेस्ट से गुजरना होगा। फिर भी, वह इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि उनके नाम पर लगा दाग अब धुल गया है और वह फिर से सिर उठाकर जी सकते हैं।