UP Fake Paneer Ban: यूपी में नकली और मिलावटी पनीर, घी, खोवा पर योगी सरकार ने बैन लगा दिया है। दूध में डिटर्जेंट और केमिकल मिलाने वालों पर अब सीधे FIR होगी और लाइसेंस रद्द होगा।
UP Fake Milk Products Ban: यूपी में मिलावटखोरों के खिलाफ योगी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने यूपी में 'एनालॉग' (Analog) पनीर, क्रीम, घी, छेना और खोवा बनाने और बेचने पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। ये फैसला उन मामलों को देखते हुए लिया गया है, जहां दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स में दूसरी चीजें मिलाकर उन्हें असली दूध उत्पाद की तरह बेचे जाने की शिकायतें और जांच में सामने आई हैं। आइए जानते हैं सरकार का आदेश क्या है, कौन-कौन सी चीजें अब नहीं बेची जा सकेंगी और ऐसा करने पर क्या एक्शन होगा...
योगी सरकार ने क्यों लिया ये फैसला?
पिछले काफी समय से यूपी के कई जिलों से शिकायतें आ रही थीं कि बाजार में धड़ल्ले से नकली डेयरी प्रोडक्ट बिक रहे हैं। जब फूड सेफ्टी विभाग ने दूध और दूध से बनी चीजों की जांच की, तो जो सच सामने आया वह डराने वाला था। 15 अगस्त को आए सरकार के आदेश के मुताबिक, अगर किसी डेयरी यूनिट में हानिकारक केमिकल, बाहरी फैट या दूसरी मिलावटी चीजें मिलती हैं तो वहां बने दूध उत्पादों को जब्त करके नष्ट कराया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर यूनिट का काम तुरंत बंद कराया जाएगा और गंभीर मामलों में FIR भी दर्ज की जाएगी।
किन 5 डेयरी प्रोडक्ट्स पर लगी रोक?
सरकार के आदेश के मुताबिक, यूपी में एनालॉग पनीर, एनालॉग क्रीम, एनालॉग घी, एनालॉग छेना और एनालॉग खोवा को लेकर सख्त रोक लगाई गई है। यानी दूध से बने असली प्रोडक्ट की जगह दूसरे फैट, केमिकल या अन्य चीजों से तैयार किए गए इन डेयरी विकल्पों को बनाने और बेचने पर कार्रवाई होगी।
एनालॉग पनीर और घी पर क्यों सख्ती?
सरकार की जांच में यूपी के अलग-अलग जिलों से दूध और दूध से बने प्रोडक्ट्स के कई सैंपल लिए गए। जांच के दौरान कुछ नमूनों में ऐसी चीजों की मौजूदगी सामने आई, जो सामान्य दूध उत्पाद का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। इनमें रिफाइंड तेल और फैट, सोयाबीन से जुड़े प्रोडक्ट, टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, हाइड्रोजन परॉक्साइड और दूसरे न्यूट्रीलाइजर जैसी चीजों का इस्तेमाल पाए जाने की बात आदेश में कही गई है। यानी दूध की जगह या दूध के साथ ऐसी चीजों का इस्तेमाल करके उत्पाद तैयार किए जा रहे थे, जिन्हें पनीर, घी, खोवा या दूसरे डेयरी प्रोडक्ट के रूप में बाजार में बेचा जा सकता है। सरकार ने इसे लोगों की सेहत से जुड़ा गंभीर मामला माना है।
एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट क्या होता है?
एनालॉग डेयरी प्रोडक्ट ऐसा प्रोडक्ट होता है जिसे दूध से बनने वाले असली प्रोडक्ट जैसा तैयार किया जाता है, लेकिन उसमें दूध के अलावा दूसरे फैट, प्रोटीन या सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर किसी प्रोडक्ट को असली दूध से बना पनीर बताकर उसमें दूसरे सोर्स का फैट या दूसरी सामग्री इस्तेमाल की जा रही है, तो यह उपभोक्ता के लिए बड़ा सवाल बन जाता है। यही वजह है कि सरकार ने ऐसे उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और बिक्री को लेकर सख्ती दिखाई है।
पनीर-घी में क्या-क्या मिलाने का मामला सामने आया?
सरकारी आदेश में जिन चीजों का जिक्र किया गया है, उनमें कई नाम आम लोगों के लिए हैरान करने वाले हैं। जांच में कुछ सैंपल में रिफाइंड तेल एवं फैट, सोयाबीन और उससे जुड़े प्रोडक्ट, टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपॉल, टीनोपॉल और हाइड्रोजन परॉक्साइड समेत कई दूसरी चीजों की मिलावट का जिक्र किया गया है। इनमें से कुछ पदार्थ औद्योगिक या दूसरे इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं। इन्हें खाद्य पदार्थों में गलत तरीके से मिलाना सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
मिलावट मिलने पर क्या एक्शन होगा, 5 बड़ी बातें?
ऑन द स्पॉट नष्ट होगा सामान
अगर अब कोई भी फैक्ट्री या डेयरी मालिक नकली पनीर या दूध का सामान बनाते हुए पकड़ा गया, तो उस पर सख्त एक्शन लिए जाएंगे। अगर किसी भी फैक्ट्री या दुकान पर खराब फैट या केमिकल वाला नकली दूध-पनीर मिलता है, तो सारा माल उसी वक्त जब्त करके नष्ट (Destroy) कर दिया जाएगा।
फैक्ट्री पर लगेगा ताला
योगी सरकार के आदेश में साफ कहा गया है कि अगर किसी फैक्ट्री में मिलावट का काम पकड़ा गया, तो जनहित और सेहत को देखते हुए ऐसी फैक्ट्रियों का काम तुरंत प्रभाव से बंद करवा दिया जाएगा।
सीधे दर्ज होगी FIR
जो लोग लोगों की सेहत के साथ खेलने के लिए जानबूझकर इन खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके खिलाफ नए कानून (BNS) की सख्त धाराओं के तहत सीधे पुलिस केस (FIR) दर्ज होगा।
ब्रांड पर लगेगा बैन
सरकार का आदेश सिर्फ यूपी में बनी चीजों तक सीमित नहीं है। अगर दूसरे राज्य में बने किसी दूध या डेयरी प्रोडक्ट में भी हानिकारक केमिकल या बाहरी फैट की पुष्टि होती है, तो संबंधित ब्रांड की यूपी में बिक्री पर प्रदेशभर में रोक लगाई जा सकती है।
लाइंसेस होगा रद्द
मिलावट मिलने पर संबंधित कारोबारी का फूड लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन तत्काल सस्पेंड किया जा सकता है। साथ ही संबंधित ब्रांड की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में रोक लगाने का प्रावधान भी आदेश में बताया गया है।


