दूध से नहीं, वनस्पति वसा से बन रहा था सस्ता पनीर! MP सरकार के अचानक एनालॉग पनीर पर लगे बैन से हिला बाज़ार। जानिए क्या है एनालॉग पनीर का खौफनाक सच और कैसे यह आपकी थाली में खामोशी से बीमारी परोस रहा था।
भोपाल: अगर आप भी होटल, रेस्तरां या शादी-ब्याह के कैटरिंग में मिलने वाले पनीर के मुरीद हैं, तो सावधान हो जाइए! प्लेट में परोसा जाने वाला यह ज़ायकेदार टुकड़ा असली दूध का नहीं, बल्कि वनस्पति वसा, पाम ऑयल और स्टार्च का एक खौफनाक केमिकल कॉकटेल हो सकता है। महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी इस 'एनालॉग पनीर' के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं।
आखिर असली पनीर से कितना अलग है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर को पारंपरिक डेयरी पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है। इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, पाम ऑयल, स्टार्च और दूसरी सामग्री इस्तेमाल की जा सकती है। यह जरूरी नहीं कि एनालॉग पनीर अपने आप में ‘नकली’ हो, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब इसे डेयरी पनीर बताकर बेचा जाए। इसकी कम कीमत के कारण होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में इसका इस्तेमाल बढ़ने की बात सामने आई है।
तड़के का फैसला: क्यों अचानक निशाने पर आया सस्ता पनीर?
बुधवार को गुजरात रवाना होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास पर आपात बैठक बुलाई। बैठक में एमपी में एनालॉग पनीर की तेजी से बढ़ती खपत पर चिंता जताई गई। सीएम यादव ने सख्त लहजे में कहा, "मध्य प्रदेश में हम एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। हम प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे और प्राकृतिक रूप से ही असली पनीर बनाएंगे।" बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में रोजाना करीब 300 से 400 क्विंटल एनालॉग पनीर की खपत हो रही थी। यानी हर महीने करीब 900 से 1200 टन नकली जैसा यह उत्पाद लोगों की थाली तक पहुंच रहा था।
असली और नकली का बड़ा खेल: आखिर क्या है 'एनालॉग पनीर'?
एनालॉग पनीर असली डेयरी पनीर का एक बेहद सस्ता और हानिकारक विकल्प है।
- सामग्री का झोल: इसमें प्राकृतिक दूध की जगह या दूध के साथ हाइड्रोजेनेटेड वेजिटेबल फैट, पाम ऑयल और इंडस्ट्रियल स्टार्च मिलाया जाता है।
- कीमत का अंतर: असली डेयरी पनीर बाजार में 350 से 450 रुपये प्रति किलो मिलता है, जबकि एनालॉग पनीर महज 150 से 250 रुपये प्रति किलो में तैयार हो जाता है। इसी कम कीमत के लालच में होटल, ढाबे और कैटरिंग वाले इसे धड़ल्ले से परोस रहे थे।
मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख: "सिगरेट पर चेतावनी लिखने से नुकसान बंद नहीं होता!"
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में कड़ी नाराजगी जताई है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एनालॉग पनीर मानव शरीर के लिए बेहद घातक है। एफएसएसएआई (FSSAI) को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, "अगर सिगरेट के पैकेट पर लिख दिया जाए कि यह हानिकारक है, तो क्या वह शरीर को नुकसान पहुंचाना बंद कर देती है? सिर्फ लेबल लगा देने से जनता की सेहत से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी जा सकती।" आयोग अब एफएसएसएआई को नोटिस जारी कर अन्य राज्यों में भी इसे प्रतिबंधित करने का दबाव बना रहा है।
साइलेंट किलर: दिल से लेकर लिवर तक पर सीधा हमला
- हार्ट अटैक का खतरा: इसमें मौजूद घटिया पाम ऑयल और ट्रांस फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज होकर कम उम्र में दिल का दौरा पड़ सकता है।
- लिवर और पाचन पर वार: हमारा लिवर सिंथेटिक फैट और पाम ऑयल को आसानी से नहीं पचा पाता। इसमें मौजूद केमिकल्स और स्टार्च पेट में जाकर बदहजमी, गैस और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियां पैदा करते हैं।
- पोषक तत्वों का शून्य: इसमें दूध वाला प्राकृतिक प्रोटीन और कैल्शियम बिल्कुल नहीं होता, जिससे शरीर में कमजोरी और मोटापा तेजी से बढ़ता है।
कैसे करें पहचान?
खरीदारी करते समय पैकेट पर FSSAI के लोगो के साथ इंग्रीडिएंट्स (Ingredients) जरूर जांचें। यदि वहां Analogue, Imitation या Vegetable Fat लिखा हो, तो समझ जाएं कि यह असली पनीर नहीं है। खुले और बिना लेबल वाले पनीर को खरीदने से बचें।
सरकार का फोकस अब प्राकृतिक दूध और पनीर पर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर रोक लगाई जाएगी और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर उसी से पनीर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि, एनालॉग पनीर से जुड़े स्वास्थ्य दावों को लेकर अंतिम निष्कर्ष उत्पाद में इस्तेमाल सामग्री और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करता है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए सबसे अहम है कि वे लेबल देखें, सामग्री समझें और डेयरी पनीर तथा एनालॉग पनीर के बीच अंतर पहचानें।


