वोटर लिस्ट से गायब हुआ मशहूर अभिनेता का नाम! क्या यह लोकतंत्र पर हमला था या पते का फेर? प्रकाश राज का वोटर लिस्ट से नाम हटने का दावा सियासी विवाद बन गया। BJP के फैक्ट-चेक में BLO की रिपोर्ट का हवाला देकर नया दावा किया गया-क्या नाम हटाया गया या पुराना पता वजह बना?
बेंगलुरू: प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज और कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) से नाम हटाए जाने को लेकर एक नया सियासी घमासान छिड़ गया है। अभिनेता प्रकाश राज ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया था कि बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम हटा (डिलीट) दिया गया है। उन्होंने इसे एक 'मज़ाक' करार देते हुए सत्ताधारी व्यवस्था पर नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने का सीधा आरोप लगाया। हालांकि, इस सनसनीखेज दावे के सामने आते ही सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया और जल्द ही इस मामले में एक नया मोड़ देखने को मिला।
'गेम ऑन' का चैलेंज और अभिनेता का तीखा हमला
अपने वीडियो संदेश में प्रकाश राज ने कहा कि वह बेंगलुरु में ही पैदा हुए, यहीं शिक्षा प्राप्त की, रंगमंच किया और यहाँ तक कि इसी क्षेत्र से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके बावजूद मतदाता सूची से नाम हटने पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “गेम ऑन... देखते हैं कि दोबारा वोटर आईडी पाने के लिए क्या-क्या कागज़ दिखाने पड़ते हैं।” इसके साथ ही उन्होंने तंज कसा कि सत्ता में बैठे लोग भले ही अपनी ताकत का इस्तेमाल कर कुछ नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दें, लेकिन वे जनता की ताकत को उन्हें सत्ता से बेदखल करने से नहीं रोक सकते।
बीएलओ की जांच में खुला राज: सच या गलतफहमी?
प्रकाश राज के इस हमले के बाद कर्नाटक बीजेपी (@BJP4Karnataka) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बेंगलुरु की नागरिक संस्था (सिटिजन बॉडी/बीबीएमपी) की तरफ से जारी की गई सफाई का हवाला दिया और अभिनेता के दावों का 'फैक्ट-चेक' किया। बीजेपी ने ट्वीट कर स्पष्ट किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा की गई जांच में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पंजीकृत (रजिस्टर्ड) पते पर पिछले चार वर्षों से नहीं रह रहे थे। बीएलओ ने पड़ोसियों, संपत्ति प्रबंधक और मकान मालिक से पुष्टि के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उनकी स्थिति को मतदाता सूची में 'शिफ्टेड' (स्थानांतरित) के रूप में दर्ज किया है।
पुराने पते का फेर: क्या कहता है चुनाव आयोग का नियम?
बीजेपी ने अपने आधिकारिक बयान में जोर देकर कहा कि तथ्य हमेशा मायने रखते हैं और पुराने हो चुके या गलत आवासीय पतों के आधार पर मतदाता सूची तैयार नहीं की जा सकती। अधिकारियों के अनुसार, चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के तहत यदि कोई मतदाता अपने पुराने पते पर नहीं रहता है, तो उसका नाम वहां से हटाकर 'शिफ्टेड' मार्क कर दिया जाता है और उसे अपने नए पते पर फॉर्म-6 के माध्यम से फिर से पंजीकरण कराने का अवसर दिया जाता है। इस स्पष्टीकरण ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और नागरिक जिम्मेदारियों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
BJP ने क्यों उठाए सवाल?
प्रकाश राज के आरोपों के बाद कर्नाटक BJP ने ‘फैक्ट-चेक’ पेश किया। पार्टी ने बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन की आधिकारिक जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया के लिए डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची में मौजूद था। BJP के मुताबिक, बाद में Booth Level Officer (BLO) की जांच में पता चला कि प्रकाश राज अपने रजिस्टर्ड पते से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके थे और कथित तौर पर करीब चार साल से उस पते पर नहीं रह रहे थे।
नाम हटाया गया या पता बदलने का मामला?
यहीं से विवाद का सबसे अहम पहलू सामने आता है। अधिकारियों के मुताबिक मामला वोटिंग राइट खत्म करने का नहीं, बल्कि पुराने पते पर दर्ज मतदाता रिकॉर्ड का है। बताया गया है कि प्रकाश राज अब अपने मौजूदा पते पर वोटर डिटेल अपडेट कर सकते हैं और इसके लिए Form 6 के जरिए नए पते पर पंजीकरण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। BJP ने इसी आधार पर प्रकाश राज के आरोपों को गलत बताया है और कहा कि मतदाता सूची पुराने आवासीय पते के आधार पर नहीं रखी जा सकती।
अब आगे क्या होगा?
इस पूरे विवाद में एक तरफ प्रकाश राज का दावा है, जबकि दूसरी तरफ स्थानीय निकाय और BJP की ओर से सामने रखा गया रिकॉर्ड है। इसलिए फिलहाल इसे सीधे तौर पर ‘वोटर लिस्ट से नाम जानबूझकर हटाने’ का मामला कहना जल्दबाजी होगी। विवाद अब इस सवाल पर टिक गया है कि प्रकाश राज का नाम वास्तव में किस प्रक्रिया के तहत मौजूदा सूची से बाहर हुआ और उनके वर्तमान पते पर मतदाता रिकॉर्ड अपडेट करने की स्थिति क्या है। अधिकारियों की सफाई के बाद मामले ने राजनीतिक आरोप से आगे बढ़कर वोटर रिकॉर्ड और पते के सत्यापन का रूप ले लिया है। (The Times of India)


