Who is Virender Singh Basoya: वीरेंद्र बसोया कौन है? 6000 करोड़ के ड्रग केस में नाम कैसे आया, दुबई में क्यों छिपा था और NCB उसे भारत कैसे लाई? जानिए पूरी कहानी।

Virender Singh Basoya: कभी दिल्ली में परिवार की प्रॉपर्टी से किराया कमाने वाला वीरेंद्र सिंह बसोया आज करीब 6,000 करोड़ रुपये के ड्रग केस का बड़ा नाम बन चुका है। ‘वीरू’ के नाम से पहचाने जाने वाले 50 वर्षीय बसोया को NCB ने UAE से भारत वापस ला लिया है। इस बीच जानिए आखिर कौन है वीरेंद्र बसोया और कैसे एक कथित तस्कर का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया?

कौन है वीरेंद्र सिंह बसोया?

NCB के मुताबिक बसोया दिल्ली के सरोजिनी नगर इलाके के पिलंजी गांव का रहने वाला है। जांच से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, उसका आपराधिक सफर कथित तौर पर दुबई से आने वाली प्रतिबंधित सिगरेट की तस्करी से शुरू हुआ। DRI की कार्रवाई और मामलों के बाद वह जांच एजेंसियों की नजर में आया। बाद में उस पर नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप लगे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि आगे चलकर बसोया ने भारत से बाहर बैठकर ड्रग्स नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभाई। वह कथित तौर पर विदेशों में मौजूद संपर्कों के जरिए ड्रग्स की सप्लाई और नेटवर्क को आगे बढ़ा रहा था।

6,000 करोड़ के पुणे केस में क्या भूमिका है?

बसोया का नाम फरवरी 2024 में सामने आए पुणे ड्रग्स मामले से जुड़ा है। NCB के अनुसार, इस केस में करीब 1,837 किलो मेफेड्रोन की बरामदगी हुई थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 6,000 करोड़ रुपये बताई गई। एजेंसी ने बसोया को इस मामले में प्रमुख आरोपी बताया है। रिपोर्टों के मुताबिक, पुणे मामले के सामने आने के तुरंत बाद बसोया भारत से निकलकर दुबई चला गया था। इसके बाद UAE में उसके अलग-अलग ठिकानों पर रहने की जानकारी जांच में सामने आई।

13,000 करोड़ वाले केस से क्या है कनेक्शन?

बसोया का नाम दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की उस बड़ी जांच में भी सामने आया, जिसमें अक्टूबर 2024 में 1,300 किलो से ज्यादा मेफेड्रोन, कोकीन और हाइड्रोपोनिक वीड की बरामदगी का मामला सामने आया था। इस केस में उसका कथित करीबी सहयोगी संदीप धुनिया मुख्य आरोपी बताया गया है। धुनिया के दुबई से पाकिस्तान पहुंच जाने की खबरों के बीच बसोया की गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के लिए अहम मानी जा रही है।

दुबई से भारत कैसे पहुंचा बसोया?

बसोया के खिलाफ NCB के अनुरोध पर इंटरपोल ने नवंबर 2025 में रेड नोटिस जारी किया था। जून 2026 में UAE में उसकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद भारतीय एजेंसियों और UAE अधिकारियों के बीच समन्वय से उसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया पूरी हुई। 14 अगस्त को उसे भारत लाया गया और दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर NCB ने हिरासत में लिया। बाद में दिल्ली की अदालत से ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे पुणे ले जाया गया, जहां अदालत ने NCB को उसकी कस्टडी दी।

अब बसोया से क्या राज खुल सकते हैं?

बसोया की गिरफ्तारी का सबसे बड़ा महत्व सिर्फ एक फरार आरोपी की वापसी नहीं है। जांच एजेंसियां अब कथित ड्रग नेटवर्क की सप्लाई चेन, विदेशों से जुड़े संपर्कों और दूसरे आरोपियों तक पहुंचने वाली कड़ियों की पड़ताल कर सकती हैं। खास नजर संदीप धुनिया से जुड़े संभावित लिंक पर भी रहेगी। यानी जिस नेटवर्क का एक अहम ऑपरेटर लंबे समय से विदेश में था, अब उसके भारत लौटने के बाद जांच का अगला फोकस ड्रग्स की सप्लाई, नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और कथित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन पर हो सकता है। हालांकि इस बीच यह ध्यान रखना जरूरी है कि बसोया के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं, दोष सिद्ध होना अभी बाकी है।