राम मंदिर CEO पद के इंटरव्यू में पूछे गए ऐसे सवाल जिसने सबको चौंकाया! 18 दावेदारों से जनेऊ, चोटी, मांसाहार, शराब, धार्मिक मान्यताओ और शाकाहार पर हुई कड़ी पूछताछ। जानिए बंद दरवाजों के पीछे चले इस सीक्रेट टेस्ट का सच।

अयोध्या: देश के सबसे हाई-प्रोफाइल और आस्था के सबसे बड़े केंद्र अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के प्रशासनिक तंत्र को संभालने के लिए पहले फुल-टाइम मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की चयन प्रक्रिया बेहद रहस्यमयी और चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। अयोध्या में राम मंदिर की देखरेख के लिए आयोजित इंटरव्यू प्रक्रिया केवल बजट, सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर या प्रशासनिक दक्षता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें उम्मीदवारों के निजी जीवन, धार्मिक मान्यताओं और खान-पान की प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल पूछे गए।

5,300 आवेदकों में से बचे 18 दिग्गज, लेकिन पहली ही कसौटी पर उठे अचरज भरे सवाल

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी CEO पद के लिए देशभर से 5,300 से अधिक पूर्व नौकरशाहों, सैन्य अधिकारियों और दिग्गजों ने आवेदन किया था। इनमें से कड़े मापदंडों के आधार पर 18 शीर्ष उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें 3 पूर्व IAS अधिकारी, 1 सेवानिवृत्त IPS अधिकारी तथा पूर्व सैन्य व शिक्षा अधिकारी शामिल हैं। हालांकि, अयोध्या पहुंचने पर इन सभी अनुभवी दिग्गजों का सामना प्रशासनिक सवालों से पहले उनकी व्यक्तिगत निष्ठा और आस्था की कड़ी कसौटी से हुआ।

34-पॉइंट का रहस्यमयी गूगल फॉर्म: जनेऊ, शिखा और खान-पान की कड़ी पड़ताल

साक्षात्कार से ठीक पहले सभी शॉर्टलिस्टेड उम्मीदवारों को 34-पॉइंट का एक विशेष Google Form भरने को दिया गया। इस फॉर्म और साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से बेहद निजी सवाल पूछे गए, जैसे:

  • क्या आप पक्के हिंदू हैं?
  • क्या आप शिखा (चोटी) रखते हैं और जनेऊ (पवित्र धागा) धारण करते हैं?
  • क्या आप पूरी तरह शाकाहारी हैं या मांसाहारी भोजन करते हैं?
  • क्या आप मदिरा (शराब) का सेवन करते हैं या पूरी तरह परहेज रखते हैं?
  • क्या आप हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारंपरिक वस्त्र पहनने में सहज महसूस करेंगे?

इसके अलावा, अभ्यर्थियों से उनकी भगवान श्री राम में आस्था, परिवार के पृष्ठभूमि, व्यवहार और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान लाखों की भीड़ को संभालने के उनके पूर्व अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ग्रीनहाउस में बंद दरवाजों के पीछे 30 मिनट का कड़ा इम्तिहान

साक्षात्कार की यह पूरी प्रक्रिया राम मंदिर परिसर के उत्तरी हिस्से में बने एक ग्रीनहाउस में बंद दरवाजों के पीछे आयोजित की गई, जहां पूर्ण गोपनीयता बनाए रखी गई। चयन समिति में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष वैज्ञानिक सुरेश हावरे शामिल थे। इंटरव्यू का प्रत्येक सेशन 25 से 30 मिनट तक चला, जिसमें उम्मीदवारों की धैर्य क्षमता, नेतृत्व गुण और सनातन धर्म के प्रति समर्पण को गहराई से परखा गया।

करोड़ों के चढ़ावे की हेराफेरी: क्यों पड़ी फुल-टाइम CEO की सख्त जरूरत?

ट्रस्ट द्वारा इतिहास में पहली बार किसी पेशेवर फुल-टाइम CEO की नियुक्ति का यह कदम जून में सामने आए चढ़ावे, सोने और कैश की चोरी के गंभीर मामले के बाद उठाया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) इस हेराफेरी की जांच कर रही है और 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने वाली है। ऐसे में नए CEO का मुख्य कार्य न केवल करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा व व्यवस्था का समन्वय करना होगा, बल्कि मंदिर के वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को पारदर्शी व अभेद्य बनाना होगा। चयन समिति 2 सितंबर से पहले अंतिम 3 नामों को ट्रस्ट को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम मोहर लगाई जाएगी।