
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को लेकर उठे विवाद ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द होने से छात्रों का पूरा शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हुआ है. अब इस मामले की गूंज सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है, जहां केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पेपर लीक को बेहद गंभीर मामला बताते हुए सरकार से कहा कि दोबारा होने वाली परीक्षा पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराई जानी चाहिए. इस पर केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि 21 जून को होने वाली NEET-UG परीक्षा के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि छात्रों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा, यह बेहद चिंताजनक है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि 2024 में दिए गए आदेश के बाद परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए. यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. अदालत ने पहले ही याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जवाब मांगा था.
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केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे मामले पर व्यक्तिगत रूप से नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने कोर्ट को बताया कि परीक्षा को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए जा रहे हैं. सरकार ने यह भी कहा कि दोबारा होने वाली परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को पहले से ज्यादा मजबूत किया गया है.
पेपर लीक विवाद के बाद कई मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं. इन याचिकाओं में मांग की गई है कि NEET जैसी अहम परीक्षा की जिम्मेदारी NTA से लेकर किसी नए और अधिक विश्वसनीय सिस्टम को दी जाए. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की जरूरत है.
हाई पावर्ड कमेटी ने दिए थे 60 सुझाव
सुनवाई के दौरान इसरो के पूर्व अध्यक्ष और हाई पावर्ड कमेटी के प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन भी सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे. उन्होंने अदालत को बताया कि 2024 में गठित समिति ने परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कुल 60 सुझाव दिए थे. राधाकृष्णन ने कहा कि इनमें से कई सुझावों को लागू भी किया जा चुका है और 2025 की परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित हुई थीं. हालांकि, NEET-UG 2026 विवाद ने फिर से सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
NEET-UG परीक्षा पहली बार 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया. अब 21 जून को पूरे देश में दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस बार परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग, प्रश्नपत्र सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है.
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों पर पड़ा है. कई छात्र मानसिक दबाव और अनिश्चितता की स्थिति में हैं. लंबे समय से परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवार अब दोबारा परीक्षा को लेकर तनाव महसूस कर रहे हैं. शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा दोबारा कराना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार करना भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी. तब तक केंद्र और NTA को परीक्षा सुरक्षा से जुड़े कदमों की पूरी जानकारी अदालत के सामने रखनी होगी. NEET विवाद अब सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है.
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