
लोकसभा में उस वक्त माहौल अलग था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति वंदन विधेयक पर बोलने के लिए खड़े हुए। यह सिर्फ एक बिल पर चर्चा नहीं थी, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और हिस्सेदारी की बात थी। पीएम मोदी ने साफ कहा, महिलाओं को जो मिल रहा है, वह कोई तोहफा नहीं, उनका हक है, जो दशकों से रुका हुआ था।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब-जब महिला आरक्षण का विरोध हुआ, देश की महिलाओं ने चुनाव में उसका जवाब दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले चुनावों में महिलाओं ने विरोध करने वालों को सख्त संदेश दिया। लेकिन 2024 में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि इस बार सभी दलों ने मिलकर सहमति से इस बिल को आगे बढ़ाया।
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पीएम मोदी ने इसे भारत के संसदीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अगर 25-30 साल पहले यह फैसला लागू हो गया होता, तो आज तक इसमें और सुधार भी हो चुके होते। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा हजारों साल पुरानी है और अब इसमें एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में “विकसित भारत” के विजन पर भी जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि विकास सिर्फ सड़क, रेल या आंकड़ों से नहीं होता, बल्कि तब होता है जब हर वर्ग की भागीदारी हो। उनके मुताबिक, देश की 50 फीसदी आबादी यानी महिलाओं को नीति निर्धारण में शामिल करना जरूरी है।
पीएम मोदी ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा कि वे एक अति पिछड़े समाज से आते हैं और यह भारतीय संविधान की ताकत है कि उन्हें देश का नेतृत्व करने का मौका मिला। उन्होंने संविधान निर्माताओं के प्रति आभार भी जताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में कमाल कर रही हैं। ऐसे में उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखना सही नहीं है। उन्होंने साफ कहा, यह फैसला राजनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में लिया गया है।
पीएम मोदी ने पिछले 25-30 सालों का जिक्र करते हुए बताया कि पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी ने बड़ा बदलाव लाया है। पहले महिलाएं चुप रहती थीं, लेकिन अब वे खुलकर अपनी बात रख रही हैं। आज देश के 900 से ज्यादा शहरों में महिला मेयर और नगर प्रमुख काम कर रही हैं।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने विपक्ष को भी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर इस फैसले का श्रेय कोई लेना चाहता है, तो वे देने को तैयार हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “आप फोटो छपवा लीजिए, हमें क्रेडिट नहीं चाहिए।”
प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि इस फैसले को राजनीति के तराजू पर न तौला जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह फैसला सर्वसम्मति से पास होता है, तो देश को एक मजबूत संदेश जाएगा और सामूहिक शक्ति से बेहतर परिणाम मिलेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं सिर्फ फैसले को नहीं, बल्कि सरकार की नीयत को भी देखेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर नीयत में खोट हुई, तो देश की नारी शक्ति इसे कभी माफ नहीं करेगी।
नारी शक्ति वंदन विधेयक पर प्रधानमंत्री का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश है, अब देश की आधी आबादी को फैसलों में बराबरी की जगह देने का समय आ गया है। यह कदम जहां महिलाओं को सशक्त बनाएगा, वहीं भारत के लोकतंत्र को भी और मजबूत करेगा। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति और नीति निर्धारण की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।
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