108 घोड़े, डमरू वादन और शिव पूजा-PM मोदी की शौर्य यात्रा के अद्भुत पल, देखें तस्वीरें-वीडियो

Published : Jan 11, 2026, 01:12 PM IST

PM Modi Somnath News: गुजरात में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान PM मोदी ने 108 घोड़ों के साथ भव्य शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। डमरू वादन, शिव पूजा और मंदिर रक्षकों के बलिदान को नमन करते हुए यह आयोजन राष्ट्रगौरव का प्रतीक बना। 

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PM Modi Somnath Shaurya Yatra: गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में रविवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने इतिहास, आस्था और राष्ट्रगौरव-तीनों को एक साथ जोड़ दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित भव्य शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। यह यात्रा उन वीर योद्धाओं को सम्मान देने के लिए निकाली गई, जिन्होंने सदियों पहले सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। 108 घोड़ों की कतार, पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार, और PM मोदी के हाथों में भगवान शिव से जुड़ा डमरू-यह नज़ारा सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश था।

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शौर्य यात्रा का मकसद क्या था?

यह शौर्य यात्रा साल 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण के 1000 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित की गई। इसका उद्देश्य था उन अनगिनत भारतीयों को याद करना, जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए जान दे दी, लेकिन आस्था को झुकने नहीं दिया।

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108 घोड़े और डमरू का क्या अर्थ है?

यात्रा में शामिल 108 घोड़े भारतीय परंपरा में पूर्णता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बजाया गया डमरू, भगवान शिव से जुड़ा हुआ है, जो सृजन, विनाश और चेतना का संकेत देता है। डमरू की गूंज के साथ सड़क किनारे खड़ी भीड़ ने “मोदी-मोदी” के नारे लगाए और फूल बरसाए।

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देशभर के कलाकार क्यों हुए शामिल?

इस यात्रा में राजस्थान, पंजाब, मणिपुर, गुजरात समेत कई राज्यों के कलाकारों ने हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि सोमनाथ सिर्फ गुजरात नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा है।

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PM मोदी ने मंदिर में पूजा क्यों की?

शौर्य यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। यह पूजा उन बलिदानों को श्रद्धांजलि थी, जिनकी वजह से आज यह मंदिर विश्वास और पुनर्निर्माण का प्रतीक बना हुआ है।

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सोमनाथ मंदिर आज भी इतना खास क्यों है?

सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार यह पहले से ज्यादा मजबूत होकर खड़ा हुआ। आज यह मंदिर लचीलापन, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। इस साल इसके आधुनिक पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो गए हैं, जिसे 1951 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटित किया था।

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सिर्फ यात्रा नहीं, एक संदेश

PM मोदी की शौर्य यात्रा सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि भारत अपने इतिहास को याद रखता है, अपने वीरों को सम्मान देता है और अपनी पहचान पर गर्व करता है।

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