
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। कई देशों के साथ-साथ भारत में भी लोग इस स्थिति को लेकर सवाल कर रहे हैं कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो उसका असर क्या होगा। इसी बीच भारत सरकार की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई गई है।
इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार शाम को देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम बैठक करने वाले हैं। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रही जंग के संभावित असर और उससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में अलग-अलग राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। केंद्र सरकार यह जानना चाहती है कि अगर वैश्विक हालात का असर भारत पर पड़ता है, तो राज्यों के पास क्या व्यवस्था है और किस तरह से मिलकर काम किया जा सकता है। सरकार का मकसद ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
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बताया जा रहा है कि जिन राज्यों में इस समय चुनावी आचार संहिता लागू है, उनके मुख्यमंत्रियों को इस बैठक में शामिल नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग के नियमों का पालन करते हुए इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से की जाएगी, जिसमें प्रशासनिक स्तर पर जरूरी तैयारियों और योजनाओं की जानकारी ली जाएगी।
सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि फिलहाल देश में किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर तुरंत फैसले लेने के लिए तैयार है।
जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में सरकार का राज्यों के साथ संवाद करना जरूरी होता है, क्योंकि किसी भी बड़े वैश्विक संकट का असर सप्लाई चेन, ऊर्जा कीमतों और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में भारत सरकार पहले से तैयारी करना चाहती है, ताकि किसी भी स्थिति में देश के भीतर व्यवस्था प्रभावित न हो। सरकार की कोशिश है कि केंद्र और राज्य मिलकर ऐसी रणनीति तैयार करें, जिससे आम लोगों पर इसका असर कम से कम पड़े और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत कदम उठाए जा सकें।
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