NEET 2026 Success Story: कबाड़ बीनने वाले परिवार के बेटे सागर रेगर ने NEET 2026 में 564 अंक और 98.6296 पर्सेंटाइल हासिल कर डॉक्टर बनने की राह बनाई। जानिए कैसे एलन शिक्षा संबल योजना और उनकी मेहनत ने आर्थिक तंगी के बावजूद सपनों को उड़ान दी।
सपने बड़े हों तो आर्थिक तंगी भी उन्हें रोक नहीं सकती। राजस्थान के कोटा जिले के पास कैथून कस्बे के गांव गोदल्याहेड़ी के रहने वाले सागर रेगर ने यही साबित किया है। कबाड़ एकत्रित कर परिवार चलाने वाले पिता के बेटे सागर ने NEET 2026 में 564 अंक, 98.6296 पर्सेंटाइल, ऑल इंडिया रैंक (AIR) 27157 और SC कैटेगरी में AIR 684 हासिल की है। सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले सागर की सफलता सिर्फ परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि शिक्षा के जरिए समाज में बदलाव लाने के संकल्प की भी मिसाल है।
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा डॉक्टर बनने का सपना
सागर ने कैथून के सरकारी विद्यालय से पढ़ाई की। उन्होंने 10वीं में 76 प्रतिशत और 12वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मेडिकल की तैयारी कराना आसान नहीं था। पिता मुरली रेगर घर-घर जाकर कबाड़ इकट्ठा कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि मां घर पर कबाड़ छांटने में उनकी मदद करती हैं।
सागर बताते हैं कि यदि उन्हें आर्थिक सहयोग नहीं मिलता तो मेडिकल की तैयारी छोड़कर बीएससी में दाखिला लेना पड़ता। लेकिन उनके स्कूल के प्रिंसिपल ने उन्हें एलन शिक्षा संबल योजना की जानकारी दी, जहां चयन होने के बाद उन्हें निशुल्क कोचिंग, आवास और भोजन की सुविधा मिली। इसी सहयोग ने उनके डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी।
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परिवार की एक घटना ने बदल दी सोच
सागर का कहना है कि उनके परिवार के कई सदस्य शिक्षा के अभाव में नशे की लत का शिकार हो गए। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनकी बुआ की बेटी को गुटखा खाने की वजह से कैंसर हो गया। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर बनने के बाद उनका उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं होगा, बल्कि समाज और खासकर युवाओं को शिक्षा के महत्व और नशामुक्त जीवन के प्रति भी जागरूक करना होगा। उनका मानना है कि शिक्षा ही सामाजिक बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।
सफलता से बदल रही है पूरे परिवार की तस्वीर
एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी एवं एलन के फाउंडर नवीन माहेश्वरी ने कहा कि सरकारी स्कूलों के हिंदी माध्यम के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई थी। ऐसे छात्रों की सफलता पूरे समाज को प्रेरित करती है।
सागर के पिता का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे ने कभी मेहनत नहीं छोड़ी। आज उसकी सफलता परिवार के साथ-साथ उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।
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