
उत्तर प्रदेश में विकास की रफ्तार को नई दिशा देने के लिए 21 और 22 फरवरी को दो अहम परियोजनाओं की शुरुआत होने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों में राज्य को सेमीकंडक्टर निर्माण और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की बड़ी सौगात देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोनों कार्यक्रमों में मौजूद रहेंगे। इन परियोजनाओं को राज्य के औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास के लिहाज से मील का पत्थर माना जा रहा है।
21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअल माध्यम से उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट “इंडिया चिप” का शिलान्यास करेंगे। यह संयंत्र यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के सेक्टर-28 में 48 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना एचसीएल ग्रुप और फॉक्सकॉन टेक्नोलॉजी ग्रुप के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित की जा रही है। कार्यक्रम स्थल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव उपस्थित रहेंगे।
यह देश की पहली डिस्प्ले ड्राइवर इंटीग्रेटेड सर्किट (DDIC) ओसैट सुविधा होगी, जहां चिप की उन्नत पैकेजिंग, असेंबली और परीक्षण किया जाएगा। परियोजना भारत सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन और राज्य सरकार के सहयोग से स्थापित की जा रही है। अनुमान है कि यह संयंत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में प्रतिवर्ष लगभग 45,000 करोड़ रुपये का योगदान दे सकता है। साथ ही करीब 3,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मानचित्र पर मजबूत पहचान मिलेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
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22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ में नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का शुभारंभ करेंगे। यह परियोजना लगभग 12,930 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई है। कार्यक्रम मेरठ के मोहिउद्दीनपुर रैली मैदान में आयोजित होगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
नमो भारत रैपिड रेल के शुरू होने से दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक का सफर एक घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। इस कॉरिडोर में कुल 15 स्टेशन होंगे और ट्रेन की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी। हर 10 मिनट में ट्रेन उपलब्ध रहेगी, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग एक लाख निजी वाहनों की आवाजाही कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक 21 किलोमीटर लंबे मेट्रो खंड में 12 स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें मेरठ साउथ, परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी, मेरठ सेंट्रल, भैंसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, डौरली, मेरठ नॉर्थ और मोदीपुरम शामिल हैं। मेट्रो की अधिकतम गति 135 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और हर 10 मिनट में सेवा उपलब्ध रहेगी। इससे शहर के भीतर यातायात दबाव कम होने और समय की बचत की उम्मीद है।
राज्य सरकार का दावा है कि इन दोनों परियोजनाओं से औद्योगिक निवेश, रोजगार और शहरी गतिशीलता को नई ऊर्जा मिलेगी। सेमीकंडक्टर संयंत्र जहां तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं रैपिड रेल और मेट्रो क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परियोजनाएं निर्धारित समय और गुणवत्ता मानकों के अनुसार संचालित होती हैं, तो उत्तर प्रदेश देश के औद्योगिक और परिवहन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। दो दिनों में मिलने वाली ये सौगातें राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती हैं।
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