PoK Protest: LoC हटाने की मांग, पुंछ-मेंढर के रास्ते खोलने को 25 हजार लोग क्यों जुटे? 5 PHOTOS

Published : Sep 29, 2026, 11:59 AM IST

PoK में अचानक ऐसा क्या हुआ कि LoC के पास 25 हजार लोगों की भीड़ और लगने लगे ‘भारत का रास्ता दो’ के नारे! PoK में 115 दिन से चल रहे आंदोलन ने अचानक क्यों बदला रुख? क्या अब प्रदर्शनकारी सीधे भारत से जुड़ने वाले रास्ते की मांग पर अड़ गए हैं?

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PoK में भड़का गुस्सा, LoC के पास जुटे हजारों लोग

PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले 115 दिनों से चल रहा आजादी का आंदोलन अब और उग्र हो गया है। नियंत्रण रेखा (LoC) से महज 7 किलोमीटर दूर मंधोल इलाके में करीब 25 हजार लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें पाकिस्तान के चंगुल से आजाद होना है और वे भारत से मिलना चाहते हैं। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है।

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PoK Protest News: मंढोल में क्यों जुटी इतनी बड़ी भीड़?

रैली का नेतृत्व JKJAAC/अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े नेता सरदार अमान खान ने किया। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में LoC को हटाना और भारत के जम्मू-कश्मीर के पुंछ तथा मेंढर से पुराने संपर्क मार्ग फिर खोलना शामिल रहा। रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन जून की शुरुआत से जारी है और पहले भी रावलाकोट समेत PoK के कई इलाकों में प्रदर्शन हो चुके हैं।

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जॉइंट अवामी लीग की हुंकार और राशन संकट

जॉइंट अवामी लीग (JAL) के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन से इस्लामाबाद की नींद उड़ गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुंछ और मेंढर का रास्ता खोला जाए, जो सीधे भारत की ओर जाता है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि पाकिस्तानी सरकार ने PoK की सप्लाई लाइन ही काट दी है, जिसके चलते वहां आटा और खाने-पीने के सामान का भारी संकट पैदा हो गया है। मुजफ्फराबाद, रावलकोट, मीरपुर और गिलगित-बाल्टिस्तान समेत कई बड़े शहरों में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं।

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PoK में सरकार और आंदोलन आमने-सामने

PoK में जारी आंदोलन के बीच राजनीतिक तस्वीर भी बदली है। 28 अगस्त 2026 को PML-N के इफ्तिखार अली गिलानी को क्षेत्र का प्रधानमंत्री चुना गया। उन्हें विधानसभा में पड़े 44 वोटों में से 30 मिले, जबकि PPP के मुख्तार अहमद अब्बासी को 14 वोट मिले। सात सीटों पर कानून-व्यवस्था के कारण चुनाव नहीं हो सके थे। हालांकि, मंढोल रैली में सामने आई मांगों और नारों को पूरे PoK की आबादी की राय मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आंदोलन का अगला चरण किस दिशा में जाता है और पाकिस्तान प्रशासन इसका सामना कैसे करता है।

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ISI की 'डाला ब्रिगेड' भी हुई फेल

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के खौफ का तरीका अब PoK में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। जिन गाड़ियों (डाला ब्रिगेड) में भरकर लोगों को उठाया जाता था, उन पर अब आम जनता खुलेआम पथराव कर रही है। स्थिति यह है कि ISI के एजेंट भी इन इलाकों में जाने से कतराने लगे हैं। दूसरी ओर, नवाज शरीफ की पार्टी PML-N ने हाल ही में हुए चुनावों के बाद वहां सरकार जरूर बना ली है, लेकिन नए पीएम इफ्तिखार गिलानी और उनके मंत्री जनता के सामने जाने से पूरी तरह बच रहे हैं।

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