
श्रीनगर/मुज़फ़्फ़राबाद: लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के दोनों तरफ का माहौल इस समय दो ऐसी अलग-अलग हकीकतों को बयां कर रहा है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी हक और आटे-बिजली के लिए सड़कों पर उतरे मासूमों पर बर्बरता से गोलियां बरसाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय सीमा में हिमालय का सीना चीरकर एशिया की सबसे बड़ी सुरंग का इतिहास लिखा जा रहा है। 9 जून मंगलवार का दिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज हो गया है, जो चीख-पुकार और तरक्की के जश्न के बीच के फासले को साफ बयां करता है।
पाकिस्तानी सत्ता के क्रूर दमन के कारण पूरा PoK इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। रावलाकोट, मुज़फ़्फ़राबाद और मीरपुर जैसे प्रमुख शहर अशांति और गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठे हैं। प्रतिबंधित 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) द्वारा बुलाए गए 'लॉन्ग मार्च' को रोकने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। इस खूनी संघर्ष में अब तक कम से कम 27 बेगुनाह लोगों की जान जाने की खबर है, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या महज 11 बताई जा रही है। सच को बाहर आने से रोकने के लिए पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं, सैकड़ों एक्टिविस्टों को जेलों में ठूंस दिया गया है और चप्पे-चप्पे पर भारी सेना तैनात है।
The story of #TwoKashmir is impossible to ignore
🎥 1: People in #PoJK protesting for affordable electricity, jobs, representation and basic rights facing deadly crackdowns.
🎥 2: Jammu & Kashmir gets the #ZojilaTunnel—an engineering marvel that will ensure year-round… pic.twitter.com/ijdohoscyI— Fatima Dar (@FatimaDar_jk) June 9, 2026
ठीक उसी समय, PoK की खूनी हिंसा से महज 100 किलोमीटर दूर पूर्व में, भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों ने भारत माता के जयकारों के साथ एक अभूतपूर्व इतिहास रच दिया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में, लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील ज़ोजिला टनल का 'फाइनल ब्रेकथ्रू' (सुरंग के दोनों सिरों का मिलना) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। शून्य से नीचे के तापमान में जब कश्मीर और लद्दाख दोनों तरफ से खुदाई कर रहे खनिकों के फावड़े जमीन के नीचे एक-दूसरे से टकराए, तो वह दृश्य देश की तकनीकी संप्रभुता का सबसे बड़ा गवाह बन गया।
CHINA WATCH THIS. NOW, INDIAN FORCES WILL HAVE ALL WEATHER ACCESS TO LAC.
CNN-NEWS18 is first channel to drive through the entire bi-directional Zojila 13.15 km long tunnel that will connect Kashmir Valley to Ladakh all year round.
Report from @AmanKayamHai_ pic.twitter.com/OFtRFDzaSF— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) June 9, 2026
यह कोई साधारण टनल नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का वो अजूबा है जो चालू होने के बाद एशिया की सबसे लंबी 'दोनों तरफ से चलने वाली' (Bi-directional) सिंगल-ट्यूब सड़क सुरंग बन जाएगी। 13.15 किलोमीटर लंबी यह जादुई सुरंग बर्फ से ढके जानलेवा ज़ोजिला दर्रे (Zojila Pass) के उस डर को हमेशा के लिए खत्म कर देगी, जो हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण लद्दाख को पूरी दुनिया से छह महीनों के लिए काट देता था। साल 2028 तक पूरी तरह शुरू होने वाली यह टनल न केवल आम जनता के लिए हर मौसम की कनेक्टिविटी पक्की करेगी, बल्कि सरहद पर तैनात भारतीय जांबाजों की रसद और सैन्य आवाजाही को भी बुलेट की रफ्तार देगी। यही वजह है कि भारत की इस रणनीतिक मजबूती से इस्लामाबाद के हुक्मरान पूरी तरह बौखलाए हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बड़ा बदलाव है। इससे:
ज़ेड-मोर्ह टनल, चिनाब रेल ब्रिज और वंदे भारत रेल सेवाओं जैसे अन्य प्रोजेक्ट भी इसी व्यापक विकास रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
PoK और भारतीय जम्मू-कश्मीर के बीच का यह अंतर केवल एक सुरंग या एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह दो अलग-अलग सोच की कहानी है। एक तरफ PoK के लोग सालों से महंगे बिजली बिलों, आटे की किल्लत, सब्सिडी खत्म होने और पंजाब-नियंत्रित पाकिस्तानी प्रशासन के दमन के खिलाफ तिल-तिल कर मर रहे हैं। साल 2024 और 2025 में भी वहां ऐसे ही हिंसक आंदोलन हुए थे, जहां "आजादी" के नारे गूंजे थे।
दूसरी तरफ, भारत के जम्मू-कश्मीर में साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विकास का एक ऐसा तूफान आया है, जिसने घाटी की तकदीर बदल दी है। जो सालाना निवेश 2021 से पहले महज 450 करोड़ रुपये था, वह साल 2025-26 में रिकॉर्ड 5,824 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। प्रशासन को 1.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के भव्य निवेश प्रस्ताव मिले हैं।
कश्मीर का दौरा कर लौटे मशहूर यूट्यूब शो 'इंडिया दिस वीक' के को-होस्ट खालिद बेग ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए इसे "बोरिंग (शांत) कश्मीर बनाम जलता हुआ PoK" का नाम दिया है। घाटी में अब पत्थरबाजी बीते जमाने की बात हो चुकी है और पिछले 2,000 से अधिक दिनों से किसी भी युवा को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ी है। आज श्रीनगर और जम्मू की वादियों से गुजरती 'वंदे भारत' ट्रेन का नजारा, गुलमर्ग के भरे हुए रेस्तरां-कैफे और रिकॉर्ड तोड़ते पर्यटक इस बात का सबूत हैं कि यहां के युवाओं ने बंदूक छोड़कर विकास का रास्ता चुन लिया है।
केंद्र सरकार ने भी साफ कर दिया है कि केंद्र शासित प्रदेश की यह व्यवस्था अस्थायी है और गृह मंत्री अमित शाह के वादे के मुताबिक सही समय आते ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस सौंप दिया जाएगा। 9 जून की इन दोनों तस्वीरों ने साफ कर दिया है कि एक तरफ जहां दमन की आग में सुलगता PoK तबाही की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत का कश्मीर पूरी दुनिया के सामने विकास का नया ग्लोबल मॉडल बनकर उभर रहा है। एक तरफ विरोध, गिरफ्तारियां और असंतोष की खबरें हैं। दूसरी तरफ सड़क, रेल, सुरंग और निवेश परियोजनाओं के उद्घाटन की तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। यही विरोधाभास आज कश्मीर के दोनों हिस्सों को लेकर सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल इतना तय है कि 9 जून की घटनाओं ने LoC के दोनों ओर मौजूद दो अलग-अलग वास्तविकताओं को एक बार फिर दुनिया के सामने ला खड़ा किया है-एक तरफ बेचैनी, दूसरी तरफ विकास का दावा। कौन सा रास्ता भविष्य तय करेगा, इस पर नजरें टिकी हुई हैं।
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