
प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर आयोजित माघ मेला अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। चौथे स्नान पर्व बसंत पंचमी और इसके बाद अचला सप्तमी के चलते संगम क्षेत्र में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। अनुमान है कि इन पर्वों और सप्ताहांत को मिलाकर करीब साढ़े तीन करोड़ श्रद्धालु त्रिवेणी में पुण्य स्नान करेंगे। इसी को देखते हुए मेला प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
बसंत पंचमी का स्नान पर्व 23 जनवरी को है, जबकि 25 जनवरी को अचला सप्तमी मनाई जाएगी। इन दोनों पर्वों के बीच 24 जनवरी को सप्ताहांत पड़ने के कारण लगातार तीन दिन मेला क्षेत्र में भारी भीड़ रहने की संभावना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचमी तिथि 22 जनवरी की रात से प्रारंभ होकर 23 जनवरी की देर रात तक रहेगी, जिसे स्नान और दान के लिए विशेष पुण्यकाल माना जा रहा है।
मेला प्रशासन का कहना है कि मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी ऐसा पर्व है, जब सबसे अधिक श्रद्धालु संगम पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर सभी व्यवस्थाएं पहले से मजबूत की गई हैं।
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श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए संगम क्षेत्र में करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे दायरे में 24 घाट तैयार किए गए हैं। घाटों की नियमित सफाई, सुरक्षित स्नान के लिए बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती और जल की निर्मलता पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि स्नानार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए बुनियादी सुविधाओं से लेकर सुरक्षा इंतजाम तक पूरी तरह दुरुस्त हैं।
भीड़ को नियंत्रित रखने और सुचारु आवागमन के लिए पांटून पुलों पर विशेष सर्कुलेशन प्लान लागू किया गया है। परेड क्षेत्र से झूंसी जाने के लिए कुछ पांटून पुल तय किए गए हैं, जबकि झूंसी से परेड की ओर आने के लिए अलग पुलों का इस्तेमाल होगा। आपात स्थिति के लिए निर्धारित पुलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा, ताकि किसी भी हालात से तुरंत निपटा जा सके।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बसंत पंचमी के दिन नया यमुना पुल बंद रखा जाएगा। इस दिन आवागमन केवल पुराने पुल से ही संभव होगा। मेला पुलिस द्वारा जारी ट्रैफिक प्लान के अनुसार, मेला क्षेत्र से असंबंधित भारी और हल्के वाहनों को प्रयागराज की सीमा में प्रवेश से पहले ही वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ा जाएगा। रूट डायवर्जन की व्यवस्था लागू कर दी गई है।
मेला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे तय मार्गों और घाटों का ही उपयोग करें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग से ही यह विशाल आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धा के अनुरूप संपन्न हो सकेगा।
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