कभी किनारे खड़ा होकर देखता था खेल, आज खुद मैदान का हीरो बन गया प्रियांश

Published : Jun 25, 2026, 04:53 PM IST
priyansh jhansi artificial limb success story narayan seva sansthan disabled child

सार

Priyansh Success Story: झांसी के 5 वर्षीय प्रियांश का एक पैर जन्म से छोटा था। 3-डी प्रिंटेड कृत्रिम अंग मिलने के बाद अब वह स्कूल जाता है, दोस्तों के साथ खेलता है और दौड़ने लगा है। पढ़िए उसकी प्रेरणादायक कहानी।

कभी-कभी जिंदगी में एक छोटा सा बदलाव किसी परिवार की पूरी दुनिया बदल देता है। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के पांच वर्षीय प्रियांश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिस उम्र में बच्चे बेफिक्र होकर मैदान में दौड़ते और खेलते हैं, उस उम्र में प्रियांश अपने हमउम्र बच्चों को दूर खड़े होकर देखा करता था। जन्मजात दिव्यांगता के कारण उसका एक पैर छोटा था, जिससे चलना-फिरना भी उसके लिए आसान नहीं था।

हर दिन उसके लिए एक नई चुनौती लेकर आता था। दोस्तों को खेलते देखकर उसके मन में भी दौड़ने और उनके साथ खेलने की इच्छा होती थी, लेकिन शारीरिक परेशानी उसे पीछे रोक देती थी। यह स्थिति केवल प्रियांश के लिए ही नहीं, बल्कि उसके माता-पिता के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई थी।

इलाज की तलाश में भटकता रहा परिवार

अपने बेटे को सामान्य जीवन देने की उम्मीद में परिवार ने कई अस्पतालों और विशेषज्ञों से संपर्क किया। हालांकि लंबे समय तक उन्हें कोई ऐसा समाधान नहीं मिला, जिससे प्रियांश की जिंदगी में वास्तविक बदलाव आ सके। इसी बीच सोशल मीडिया के जरिए परिवार को नारायण सेवा संस्थान के बारे में जानकारी मिली। नई उम्मीद के साथ परिवार जून के पहले सप्ताह में संस्थान पहुंचा, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने प्रियांश की विस्तृत जांच की।

3-डी प्रिंटेड कृत्रिम अंग ने बदली जिंदगी

चिकित्सकीय परीक्षण के बाद 9 जून को प्रियांश को जापान और जर्मन तकनीक से विकसित अत्याधुनिक 3-डी प्रिंटेड नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब उपलब्ध कराया गया। यह सिर्फ एक कृत्रिम अंग नहीं था, बल्कि उसके लिए आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत साबित हुआ। कृत्रिम अंग लगाने के बाद प्रियांश की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई। अब वह पहले की तुलना में अधिक सहजता से खड़ा हो सकता है, चल सकता है और स्कूल भी नियमित रूप से जाने लगा है।

अब दोस्तों के साथ खेलता और दौड़ता है

सबसे बड़ा बदलाव उसके आत्मविश्वास में देखने को मिला है। जो बच्चा कभी मैदान के किनारे खड़ा होकर दूसरों को खेलते देखता था, वह आज अपने दोस्तों के साथ दौड़ता, खेलता और बचपन के हर पल का आनंद ले रहा है। प्रियांश की मुस्कान उसके माता-पिता के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। वर्षों की चिंता और संघर्ष के बाद आज उनका बेटा सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी जीने की ओर बढ़ रहा है।

उम्मीद और हौसले की मिसाल

प्रियांश की कहानी केवल एक बच्चे के जीवन में आए बदलाव की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों के लिए भी प्रेरणा है जो किसी शारीरिक चुनौती से जूझ रहे हैं। सही समय पर मिली तकनीक, विशेषज्ञों का सहयोग और परिवार का अटूट विश्वास किसी भी कठिन परिस्थिति को नई उम्मीद में बदल सकता है। आज प्रियांश आत्मविश्वास से कहता है, "मैं भी दौड़ सकता हूं।" यही उसकी सबसे बड़ी जीत है।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

NEET दोबारा देने के बाद छात्र ने दी जान, 33 सेकंड के वीडियो मैसेज में लिखा- मां टेंशन मत लेना
केतन की हत्या से पहले का वो आखिरी VIDEO, देखें सिया ने प्रेमी संग कहां-कैसे रची साजिश