
Puducherry Assembly Election 2026 की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने 15 मार्च 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुडुच्चेरी की 30 विधानसभा सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित होंगे।
कुल 9.44 लाख मतदाता हैं, जिनमें 4.43 लाख पुरुष, 5 लाख महिला और 139 थर्ड जेंडर शामिल हैं। 1,099 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें 100% वेबकास्टिंग होगी। NDA गठबंधन (AINRC-BJP) ने सीट बंटवारा तय कर लिया है - AINRC 16 सीटें, BJP 14 पर लड़ेगी।
पिछले चुनाव में NDA ने 16 सीटें जीतीं, AINRC सबसे बड़ी पार्टी (10 सीटें) बनी। N. रंगास्वामी चौथी बार CM बने। UPA को 8 सीटें मिलीं - DMK 6, कांग्रेस 2। वोटर टर्नआउट 84.8% रहा।
पुडुचेरी में चुनावी माहौल गरमाने लगा है। एक तरफ सत्ताधारी NDA है, जिसमें AINRC और BJP शामिल हैं, तो दूसरी तरफ DMK और कांग्रेस का गठबंधन चुनौती देने को तैयार है। आइए समझते हैं कि दोनों खेमों की क्या ताकतें और कमजोरियां हैं।
ताकत: मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी के विकास कार्य सरकार के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट हैं। सीएम की छवि साफ-सुथरी है और सरकार को लेकर लोगों में अच्छी राय है।
कमजोरी: सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अपराध के मामले बढ़े हैं। नकली दवा बनाने वाली यूनिट्स में कुछ नेताओं की मिलीभगत के आरोप भी एक बड़ी कमजोरी हैं। इसके अलावा, AIADMK भी सीटों के बंटवारे का इंतजार कर रही है, जिससे गठबंधन में थोड़ी खींचतान है।
मौका: केंद्र में BJP की अगुवाई वाली NDA सरकार है। इसका हिस्सा होने की वजह से पुडुचेरी को विकास के लिए केंद्र से मदद मिल सकती है, जो एक बड़ा मौका है।
चुनौती: पुडुचेरी को राज्य का दर्जा न मिलना एक बड़ा मुद्दा है। चुनी हुई सरकार के पास पूरे अधिकार नहीं हैं। अकेली महिला मंत्री चंद्रिरा प्रियंगा को कैबिनेट से हटाना भी सरकार के लिए एक चुनौती बन गया है। केंद्र पर बहुत ज्यादा निर्भरता भी एक तरह की चुनौती है। NTK, LJK और TVK जैसी छोटी पार्टियां भी वोट काटकर खेल बिगाड़ सकती हैं।
ताकत: कांग्रेस की जड़ें यहां काफी मजबूत रही हैं और अब वह अपनी ताकत फिर से बढ़ा रही है। DMK भी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बना रही है। प्रचार के मामले में भी यह गठबंधन पीछे नहीं है।
कमजोरी: गठबंधन का नेता कौन होगा और मुख्यमंत्री का चेहरा किसे बनाया जाएगा, इस पर कांग्रेस और DMK के बीच अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। सीटों के बंटवारे को लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है, जो एक बड़ी कमजोरी है।
मौका: सत्ताधारी सरकार 'बेस्ट पुडुचेरी' का वादा पूरा करने में नाकाम रही है। सरकार के खिलाफ जो एंटी-इनकंबेंसी या नाराजगी है, उसका फायदा DMK गठबंधन को मिल सकता है।
चुनौती: कांग्रेस पार्टी कुछ ही बड़े नेताओं पर निर्भर है, जो एक जोखिम है। गठबंधन की सहयोगी पार्टी DMK के साथ अंदरूनी मतभेद भी एक चुनौती है। सीटों का बंटवारा फाइनल न होना भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। यहां भी NTK, LJK और TVK जैसी पार्टियां मुकाबले को मुश्किल बना सकती हैं।
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