
नई दिल्ली: देश के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भूचाल आ गया जब मंगलवार को राजधानी दिल्ली ने एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखा जो हाल के इतिहास में विरला ही है। NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के समर्थन में उतरे विपक्ष के तेवर अब सातवें आसमान पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर अभूतपूर्व धरने और उसके बाद शीर्ष नेताओं की हिरासत ने देश की सियासत को पूरी तरह गर्मा दिया है। लेकिन असली सस्पेंस तब शुरू हुआ जब देर रात हिरासत से रिहा होने के तुरंत बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीधे केंद्र सरकार के सामने पांच ऐसी शर्तें रख दीं, जिन्होंने बुधवार को होने वाले संसद सत्र से पहले सरकार की रणनीतिक टीम को बैकफुट पर धकेल दिया है।
मंगलवार की दोपहर जब दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के अन्य दिग्गज नेताओं को हिरासत में लिया, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि यह गतिरोध कितनी लंबी खिंचेगा। राहुल गांधी को सुरक्षा घेरे में छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया, वहीं प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में रखा गया, जहां खुद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंचीं। लगभग 8 घंटे के भारी सस्पेंस और सियासी उठापटक के बाद रात करीब 9 बजे दोनों भाई-बहनों को रिहा किया गया। लेकिन रिहाई से ठीक पहले, स्टेडियम के भीतर से ही राहुल गांधी ने एक वीडियो बयान जारी कर दिया। इस वीडियो ने आग में घी का काम किया। राहुल गांधी ने सरकार के सामने जो पांच मांगें रखी हैं, वे किसी सीधे अल्टीमेटम से कम नहीं हैं। इन मांगों ने यह साफ कर दिया है कि विपक्ष अब इस लड़ाई को तार्किक अंजाम तक ले जाने से पीछे नहीं हटेगा।
Rahul Gandhi Video Message to the Students of India and to the Prime Minister. He demands Resignation of Home Minister Amith shah and Education Minister Dharmendra Pradhan and action should be taken against Delhi Police those who beaten students.
In a video message of Lok Sabha… pic.twitter.com/NwQJmH7Q9m— Surya Reddy (@jsuryareddy) July 21, 2026
राहुल गांधी के वीडियो संदेश ने सीधे सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर चोट की है। उनके द्वारा रखी गई पांच प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
राहुल गांधी ने तीखे सवाल दागते हुए पूछा, "भारतीय शिक्षा प्रणाली क्यों चरमरा रही है? पेपर क्यों लीक हो रहे हैं? परिवारों को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से बर्बाद क्यों होना पड़ता है? ये जायज सवाल हैं और इन्हें पूछने में कोई बुराई नहीं है।"
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला वाकया तब घटा जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के बाहर सड़क पर धरने पर बैठे थे। अचानक पीएमओ (PMO) में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह धरना स्थल पर पहुंचे। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का इस तरह सीधे प्रदर्शन स्थल पर आना हर किसी को हैरान कर गया। जितेंद्र सिंह ने लगभग आधे घंटे तक राहुल गांधी से आमने-सामने बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। हालांकि, इस बातचीत के बाद सियासी बयानबाजी और तीखी हो गई। जितेंद्र सिंह ने बाद में राहुल गांधी पर अपनी ही बात से पलटने का आरोप लगाते हुए कहा, "पहले राहुल गांधी संसद में सिर्फ बहस की मांग कर रहे थे, लेकिन अब वे सीधे मंत्रियों के इस्तीफे पर अड़ गए हैं। यह उनके कद के नेता को शोभा नहीं देता और लोकतंत्र के हर नियम के खिलाफ है।" सिंह ने दावा किया कि सरकार सदन में चर्चा के लिए 100% तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।
"It was learnt that Congress Party National President Mallikarjun Kharge and other senior leaders like Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi and other had suddenly started a protest. It was also reported that the place was not very conducive to a sit-in protest. It was causing… pic.twitter.com/8EVA200wNj
— Dr Jitendra Singh (@DrJitendraSingh) July 21, 2026
विवादों के केंद्र में घिरे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी अब पूरी तरह आक्रामक मुद्रा में आ चुके हैं। मंगलवार की देर रात उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए उन पर और पूरी कांग्रेस पार्टी पर "छात्रों के शोषण" का संगीन आरोप लगाया। प्रधान ने 'X' पर एक बेहद तल्ख पोस्ट में लिखा कि जब सरकार संसद के भीतर व्यापक चर्चा के लिए तैयार थी, तब कांग्रेस ने लोकतांत्रिक बहस का रास्ता छोड़ने का फैसला किया क्योंकि उनका मकसद कभी समाधान खोजना था ही नहीं। शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सिर्फ "राजनीतिक सुर्खियां" बटोरने के लिए देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और चर्चा के सारे रास्ते खुले होने के बावजूद जानबूझकर टकराव का माहौल पैदा कर रही है। दोनों पक्षों के इन कड़े रुख को देखकर यह साफ है कि बुधवार को संसद के भीतर एक बड़ा राजनीतिक तूफान आने वाला है।
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