Dausa Rajasthan viral video: राजस्थान के दौसा में घोड़ी पर बैठे बुजुर्ग का वीडियो ऑनलाइन डिलीवरी बताकर वायरल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर के अलग-अलग रिएक्शन सामने आ रहें हैं, जानिए वीडियो की सच्चाई क्या है?
क्या बुजुर्ग सच में कर रहे थे घोड़े पर ऑनलाइन डिलीवरी?
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से घूम रहा है। वीडियो में एक बुजुर्ग ताऊ घोड़ी पर बैठे नजर आ रहे हैं। उनके पीछे एक बड़ा बैग टंगा है। इसी बैग को देखकर दावा किया जा रहा है कि वह बुजुर्ग ऑनलाइन डिलीवरी का काम कर रहे हैं। वीडियो के साथ मजाक और तंज भरे कैप्शन भी लिखे जा रहे हैं, जिससे लोग इसे सच मानकर शेयर कर रहे हैं। लेकिन क्या वाकई यह ऑनलाइन डिलीवरी का मामला है?
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वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
वीडियो पर लिखा है, “ये है राजस्थान! जहाँ आज के कई युवाओं को घोड़ी चढ़ने का मौका नहीं मिल रहा, वहीं हमारे बुजुर्ग घोड़े पर सवार होकर ऑनलाइन डिलीवरी करते नजर आ रहे हैं। समय बदल गया है, लेकिन राजस्थान की शान और स्वैग आज भी वैसा ही है—यहाँ उम्र नहीं, हौसला चलता है।” इस लाइन के साथ वीडियो को हजारों बार शेयर किया जा चुका है। कई यूजर्स इसे मौजूदा हालात से जोड़कर कमेंट भी कर रहे हैं।
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जांच में सामने आया असली सच
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पड़ताल में पता चला कि वीडियो में दिख रहे बुजुर्ग का नाम गिर्राज गुर्जर है। वह दौसा जिले के खैरवाल गांव के रहने वाले हैं। गांव के लोगों और जानकारों के मुताबिक, गिर्राज गुर्जर का काम शादियों में दूल्हे के लिए घोड़ी उपलब्ध कराना है। यानी वह घोड़ी किराए पर देने का काम करते हैं।
वीडियो में उनके पीछे जो बैग दिख रहा है, वही भ्रम की वजह बना। बैग ब्लिंकइट कंपनी का है, लेकिन हकीकत यह है कि उस बैग में घोड़ी को सजाने का सामान रखा हुआ था। इसमें सजावट से जुड़ी चीजें थीं, जिनका इस्तेमाल शादी-ब्याह में किया जाता है। यानी गिर्राज गुर्जर किसी भी तरह की ऑनलाइन डिलीवरी नहीं कर रहे थे।
जानकारी के मुताबिक यह वीडियो दौसा-भांकरी मार्ग का बताया जा रहा है। उसी रास्ते से गुजरते समय किसी ने यह वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ शेयर कर दिया। इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया और लोग बिना जांचे-परखे इसे आगे बढ़ाते रहे।
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फैक्ट चेक क्यों ज़रूरी है?
सोशल मीडिया पर रोज ऐसे कई वीडियो वायरल होते हैं, जिनमें आधी-अधूरी जानकारी या गलत दावा जोड़ दिया जाता है। ऐसे मामलों में जरूरी है कि हम किसी भी वीडियो या पोस्ट को सच मानने से पहले उसकी पुष्टि करें। गलत जानकारी न सिर्फ भ्रम फैलाती है, बल्कि किसी व्यक्ति की छवि पर भी असर डाल सकती है।
दौसा का यह वायरल वीडियो ऑनलाइन डिलीवरी से जुड़ा नहीं है। बुजुर्ग व्यक्ति घोड़ी किराए पर देने का काम करते हैं और बैग में सजावट का सामान था। इसलिए सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा पूरी तरह भ्रामक है। याद रखिए, हर वायरल वीडियो सच नहीं होता। शेयर करने से पहले एक बार सच्चाई जरूर जांच लें।
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