
Ram Mandir Donation Row: अयोध्या इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह कोई त्योहार या उत्सव नहीं, बल्कि राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित हेराफेरी और चोरी का विवाद है। शुक्रवार, 19 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अयोध्या पहुंचे, हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए और जनसभा में विरोधियों पर जमकर बरसे। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा चंपत राय की रही। राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे बड़े चेहरे योगी के इस पूरे आयोजन से दूर रहे। वे उस वक्त राम जन्मभूमि से करीब 4 किलोमीटर दूर कारसेवकपुरम में थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर चंपत राय कौन हैं, जिनका नाम इस पूरे विवाद के केंद्र में बार-बार आ गया है? उनका राम मंदिर से क्या कनेक्शन है? कैसे इतने पावरफुल बन गए हैं। आइए जानते हैं कहानी...
चंपत राय इस समय 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के महासचिव हैं। आसान भाषा में कहें तो मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज, पैसों का हिसाब किताब, मंदिर निर्माण की देखरेख और मीडिया से बातचीत की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। मंदिर से जुड़ी बड़ी घोषणाएं हों, व्यवस्थाएं हों या ट्रस्ट का पक्ष रखना हो, अक्सर चंपत राय ही सामने दिखाई देते हैं।
चंपत राय पश्चिमी यूपी के बिजनौर जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े थे, इसलिए बचपन से ही वे संघ की शाखाओं में जाने लगे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक टीचर के रूप में की थी। वे बिजनौर के RSM डिग्री कॉलेज में केमेस्ट्री (Chemistry) पढ़ाते थे। साल 1980 के दशक में उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और देश सेवा के लिए संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए। उन्होंने आगरा, देहरादून और हरिद्वार जैसी जगहों पर संगठन को मजबूत किया।
जब 1980 के दशक में राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा, तब चंपत राय को विश्व हिंदू परिषद (VHP) में भेजा गया। वे आंदोलन के सबसे बड़े नेता अशोक सिंघल के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार बन गए। BBC की रिपोर्ट के अनुसार, चंपत राय कभी बहुत ज्यादा मंचों पर भाषण देते नहीं दिखते थे, लेकिन पर्दे के पीछे की पूरी रणनीति वही बनाते थे। कोर्ट के मुकदमों के लिए सबूत और दस्तावेज जुटाना, बड़े वकीलों के साथ बैठकें करना और पूरे देश के कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का काम चंपत राय ही देखते थे।
उनकी यही मेहनत की वजह है कि जब साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया और सरकार ने मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट का गठन किया, तो चंपत राय को इसका महासचिव बनाया गया। साल 2021 में जब देशव्यापी चंदा अभियान ('निधि समर्पण अभियान') चला, तो उसकी पूरी कमान भी चंपत राय के ही हाथों में थी।
समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि मंदिर के चढ़ावे और दान के पैसों में करोड़ों रुपए की चोरी हुई है। हालांकि, एसआईटी की जांच में अब तक दान के पैसों की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं और उनके पास से करीब 2 करोड़ रुपए और कुछ सोना भी बरामद हुआ है। एसआईटी की टीम ने चंपत राय से भी पहले और दूसरे दिन कई घंटों तक पूछताछ कर पूरी प्रक्रिया को समझा है।
चंपत राय के चाहने वालों का कहना है कि चंपत राय बेहद सिंपल जिंदगी जीते हैं। उन्होंने दशकों तक बिना किसी लालच के संगठन के लिए काम किया है, इसलिए उनकी निजी ईमानदारी पर शक नहीं किया जा सकता। जबकि आलोचकों और विरोधियों का मानना है कि चूंकि चंपत राय ट्रस्ट के सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर बैठे हैं, इसलिए उनकी नाक के नीचे अगर इतनी बड़ी गड़बड़ी हुई है, तो जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है।
आज अयोध्या दौरे पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कह दिया है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए एसआईटी बिठा दी गई है, जो दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी। उन्होंने लोगों से अपील की है कि '15 दिन का इंतजार करें, इस मामले का कोई भी अपराधी बचेगा नहीं।'
श्री राम जन्मभूमि मंदिर को अपमानित करने वाले लोगों के बहकावे में कतई न आएं...
SIT जांच दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी...
अगर कोई अपराधी है, वह बचेगा नहीं, यह सुनिश्चित है... pic.twitter.com/8YsbHVBKUv— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 19, 2026
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