
Ram Mandir Donation Theft: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के चरणों में अर्पित किए गए दान के पैसे की कथित चोरी ने देश के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में एक ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी गूंज अब लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। उत्तर प्रदेश की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में अपनी बेहद गोपनीय और सनसनीखेज 20 पन्नों की रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही कई ऐसे राज खुले हैं, जिन्होंने न सिर्फ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को कटघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि करोड़ों सनातनी भक्तों की आस्था को भी गहरी चोट पहुंचाई है। जांच एजेंसी द्वारा सौंपे गए उस 20 पन्नों के दस्तावेज में छिपे 10 सबसे बड़े और चौंकाने वाले खुलासे नीचे दिए गए हैं:
कैमरे की नजर में आया पाप: SIT ने जब 27 अप्रैल, 2026 से लेकर 5 जून, 2026 तक के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मंदिर परिसर के सुरक्षा कैमरों में एक या दो नहीं, बल्कि चोरी की पूरी 70 अलग-अलग वारदातें साफ तौर पर रिकॉर्ड पाई गईं।
पर्दे के पीछे की गहरी साजिश: यह चोरी कोई हाल-फिलहाल में शुरू नहीं हुई थी। जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दान के पैसे और कीमती सामानों की यह सुनियोजित हेराफेरी पिछले 2 से 3 सालों से लगातार और बेहद शातिर तरीके से अंजाम दी जा रही थी।
एक बड़ा संगठित गिरोह: SIT की समीक्षा के अनुसार, इस पूरे काले कारनामे में किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं है। जांच के घेरे में इस समय लगभग 70 ऐसे संदिग्ध लोग आ चुके हैं, जिनके इस नेटवर्क से सीधे जुड़े होने का गहरा अंदेशा है।
कमजोर कड़ियों का फायदा: रामलला के खजाने की सुरक्षा किस कदर लाचार थी, इसका खुलासा करते हुए SIT ने बताया कि दान के पैसे की गिनती करने वाले सेंटरों (काउंटिंग रूम) से लेकर इसके अंतिम मैनेजमेंट तक की पूरी प्रक्रिया में गंभीर और संदिग्ध सुरक्षा कमियां मौजूद थीं।
हस्ताक्षर के बाद भी धोखा: सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच हुई बैठकों के बाद एक कड़ा नियम यानी एसओपी (SOP) तैयार किया गया था। इस पर स्टेट बैंक की ओर से गोविंद मिश्रा और ट्रस्ट की ओर से अनिल मिश्रा ने हस्ताक्षर भी किए थे, लेकिन गिनती के वक्त जानबूझकर इस एसओपी को नजरअंदाज कर लापरवाही बरती गई।
खजाने की खुली चाबी: इस पूरी साजिश के मुख्य किरदारों में से एक, रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास बिना किसी आधिकारिक अनुमति या अधिकार के सीधे तिजोरी की चाबियां मौजूद रहती थीं, जिसका इस्तेमाल वह कैश और कीमती सामानों को गायब करने के लिए करता था।
शीर्ष कमान पर उंगली: SIT ने अब तक मिले इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर सीधे तौर पर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा की प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिससे ट्रस्ट के भीतर हड़कंप मच गया है।
कड़ी पूछताछ में टूटे कातिल: पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य साजिशकर्ता सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव ने पूछताछ में बड़े खुलासे किए हैं। सुभाष ही वह शख्स था जो बाहरी लोगों को इस नेटवर्क से जोड़ता था और उन्हें डोनेशन गिनने जैसी अहम और संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपता था।
जल्द होंगी और गिरफ्तारियां: आरोपियों के कबूलनामे के बाद कई बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों के नाम भी सामने आए हैं। SIT ने इस पूरे मामले को एक 'संगठित अपराध' माना है, जिसके तहत आने वाले दिनों में कई बड़े सरकारी मुलाजिमों पर गाज गिरना तय है।
29 जून तक जेल में संदिग्ध: इस मामले में नामजद सभी 8 संदिग्धों-अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव-को गिरफ्तार कर 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ताओं ने अब तक इनके पास से 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद कर ली है।
इस महा-खुलासे के बाद चंपत राय के इस्तीफे की अफवाहें जोरों पर हैं, हालांकि विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अभी तक इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। दूसरी तरफ, सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कसम खाई है कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस बीच, विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने इसे "धर्म युद्ध" करार देते हुए कथित चंदा चोरों के सामाजिक बहिष्कार की अपील की है। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बेहद तीखा तंज कसते हुए कहा है कि "भाजपा का लंकाकांड अब सीधे अयोध्या से ही शुरू हो गया है।" कांग्रेस ने भी इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने और वर्तमान मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की पुरजोर मांग उठा दी है, जिसने इस पूरे मामले के सस्पेंस को राजनीतिक पटल पर और ज्यादा गहरा कर दिया है।
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