
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। जिस मंदिर की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बताया जाता रहा, वहीं चढ़ावे में कथित तौर पर लगातार चोरी होने के आरोपों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की जांच कर रही एसआईटी और पुलिस की कार्रवाई के बीच सबसे ज्यादा चर्चा राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय की हो रही है। पुलिस ने उनका बयान दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने चोरी में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि संदिग्धों की गिरफ्तारी भी उनके कहने पर हुई। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ की जा सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी की शुरुआती जांच में दावा किया गया कि 24 अप्रैल से 5 जून के बीच महज 43 दिनों में करीब 70 बार चढ़ावे में चोरी की घटनाएं हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि 24 अप्रैल से पहले की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे जांच और भी जटिल हो गई है। पुलिस ने 24 जून को ट्रस्ट की औपचारिक शिकायत के बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद उनके ठिकानों पर छापेमारी कर नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी और मोबाइल फोन जब्त किए गए। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ डिजिटल सबूत मिटाने की भी कोशिश की गई।
राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक चंपत राय की अहम भूमिका रही है। ऐसे में इस मामले में उनका नाम सामने आने के बाद विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने सुरक्षा व्यवस्था और निजी सुरक्षा गार्डों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं, जबकि अन्य विपक्षी दल भी जांच की पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय को कथित चोरी की जानकारी मई के अंत में ही मिल गई थी। विपक्ष का आरोप है कि यदि शुरुआती स्तर पर जानकारी थी, तो तत्काल एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कराई गई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
चंपत राय और ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्र ने अपने-अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। इन इस्तीफों पर अंतिम फैसला 6 जुलाई को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में लिया जाएगा। वहीं गोपाल राव समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों की कथित चोरी तक सीमित था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जिम्मेदारी किन लोगों पर तय होती है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरे घटनाक्रम की सच्चाई क्या है।
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