
लोकतंत्र की असली ताकत तब दिखाई देती है, जब लोग घरों से निकलकर मतदान केंद्र तक पहुंचते हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने इस बार यही तस्वीर देश के सामने रखी है। भीषण गर्मी, उमस और चुनावी तनाव के बावजूद मतदाताओं ने जिस उत्साह के साथ मतदान किया, उसने आजादी के बाद का नया रिकॉर्ड बना दिया।न मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने दोनों राज्यों में हुए भारी मतदान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह आजादी के बाद अब तक का सबसे ऊंचा वोटिंग ग्राफ है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर मतदाता को सलाम करते हुए इसे लोकतंत्र के प्रति जनता की मजबूत आस्था बताया।
चुनाव आयोग के अनुसार, तमिलनाडु में 84.69 फीसदी और पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 91.78 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। यह दोनों राज्यों में स्वतंत्र भारत के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। इससे पहले तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदान 2011 में 78.29 फीसदी दर्ज हुआ था, जबकि पश्चिम बंगाल में 2011 में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार दोनों राज्यों ने अपने पुराने रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया। विशेष बात यह भी रही कि दोनों राज्यों में महिलाओं की मतदान भागीदारी पुरुषों से अधिक दर्ज की गई, जो लोकतांत्रिक जागरूकता का मजबूत संकेत माना जा रहा है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “आजादी के बाद से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज्यादा पोलिंग परसेंटेज दर्ज हुआ है। चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के हर वोटर को सलाम करता है।” उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान यह साबित करता है कि लोग लोकतंत्र में अपनी भागीदारी को गंभीरता से लेते हैं और चुनावी प्रक्रिया पर उनका भरोसा मजबूत है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि पहले चरण का मतदान 152 विधानसभा सीटों और 45,000 बूथों पर संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर देर शाम तक मतदान जारी रहा, जबकि अन्य स्थानों पर कागजी कार्रवाई और EVM सील करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद मशीनों को स्ट्रॉन्ग रूम में भेजा गया।
उन्होंने कहा, “लोगों ने बिना किसी डर के वोट डाला। व्यवस्थाओं को लेकर उन्हें संतोष था और घटनाएं भी कम हुईं। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों का धन्यवाद।” हालांकि कुछ जिलों में उम्मीदवारों पर हमले और छिटपुट हिंसा की खबरों ने चुनावी माहौल में तनाव भी पैदा किया।
पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मतदान प्रतिशत 90 फीसदी के पार पहुंच गया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। सबसे अधिक मतदान दक्षिण दिनाजपुर में करीब 94.77 फीसदी दर्ज किया गया। इसके बाद कूचबिहार में 94.40 फीसदी, बीरभूम में 93.61 फीसदी और जलपाईगुड़ी में 93.01 फीसदी मतदान हुआ। इसके अलावा:
अलीपुरद्वार, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जैसे जिलों में भी मतदान 89 से 91 फीसदी के बीच रहा। दार्जिलिंग में 88.01 फीसदी और कलिम्पोंग में 82.93 फीसदी मतदान दर्ज हुआ, जो अन्य जिलों की तुलना में कम जरूर रहा, लेकिन फिर भी मजबूत भागीदारी मानी गई।
राज्य के 16 जिलों में हुए इस मतदान के जरिए 294 सदस्यीय विधानसभा की 152 सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत तय होगी। इन सीटों पर कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 167 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ था और सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। भीषण गर्मी और उमस के बावजूद मतदाताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। जैसे-जैसे दिन बढ़ा, मतदान की रफ्तार भी तेज होती गई।
इस चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु दोनों में महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल मतदान प्रतिशत का आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और राजनीतिक जागरूकता का संकेत है। महिला मतदाता अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि चुनावी परिणामों को प्रभावित करने वाली निर्णायक शक्ति बन चुकी हैं।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास का प्रमाण है। जब लोग कठिन परिस्थितियों के बावजूद मतदान केंद्र तक पहुंचते हैं, तो यह सिर्फ वोट नहीं होत, यह लोकतंत्र के प्रति उनकी जिम्मेदारी का प्रदर्शन होता है। इस बार के आंकड़े यही बताते हैं कि भारत का मतदाता अब पहले से कहीं ज्यादा जागरूक, सक्रिय और निर्णायक हो चुका है।
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