Iran Rejects Pakistan’s Mediation for Nuclear Talks: ईरान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवालों के बीच सेना प्रमुख आसिम मुनीर की कूटनीति को बड़ा झटका लगा है। जानें पूरा मामला और इसके असर।

Iran Rejects Islamabad Meeting: मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर खड़ी है। जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। इस्लामाबाद में प्रस्तावित अहम बैठक से पहले ही ईरान का पीछे हटना, क्षेत्रीय कूटनीति के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु डील को लेकर एक अहम बैठक अपने यहां आयोजित करने की योजना बनाई थी। इस पहल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी खुद असीम मुनीर ने संभाली थी। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद Iran इस बैठक में शामिल होने को तैयार नहीं हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद को अब तक तेहरान की ओर से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है।

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तेहरान दौरा भी नहीं आया काम

सूत्रों के अनुसार, असीम मुनीर खुद 48 घंटे के लिए तेहरान गए थे, ताकि ईरान को बातचीत के लिए राजी किया जा सके। उन्होंने सीधे बातचीत कर भरोसा दिलाने की कोशिश की, लेकिन इसके बावजूद ईरान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित बैठक से दूरी बना ली।

ईरान को पाकिस्तान पर क्यों नहीं भरोसा?

ईरान के इस रुख के पीछे कई वजहें सामने आ रही हैं-

1. संकट के समय पाकिस्तान की चुप्पी

रिपोर्ट्स के अनुसार, जब US और Israel ने ईरान पर हमला किया था, तब पाकिस्तान ने खुलकर समर्थन नहीं किया। इससे तेहरान में यह संदेश गया कि पाकिस्तान अमेरिका के खिलाफ खुलकर खड़ा नहीं हो सकता।

2. गारंटी देने में असमर्थता

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान को इस बात का भरोसा नहीं है कि अगर भविष्य में अमेरिका अपने वादे से पीछे हटता है, तो पाकिस्तान कोई ठोस कदम उठा पाएगा। यही कारण है कि इस बार ईरान ने वार्ता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता दिखाई है।

3. बाहरी प्रभाव का संदेह

ईरान के पूर्व उपराष्ट्रपति Amir Hossein Ghazizadeh ने भी साफ कहा कि जिस देश के संबंध Saudi Arabia और United States से इतने गहरे हों, उस पर मध्यस्थ के तौर पर भरोसा करना मुश्किल है। उनका इशारा साफ था कि पाकिस्तान पूरी तरह निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा सकता।

चीन की चुप्पी भी बना कारण?

पिछली बार जब ईरान ने इस्लामाबाद में बातचीत के लिए हामी भरी थी, तब China की भूमिका अहम मानी गई थी। लेकिन इस बार चीन की तरफ से कोई सक्रिय पहल नहीं दिख रही, जिससे ईरान और भी सतर्क हो गया है।

मुनीर की कूटनीति को झटका

Asim Munir ने इस पूरे प्रयास में व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी दिखाई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने पारंपरिक तरीकों से हटकर सीधे तेहरान जाकर बातचीत की और फिर अमेरिकी नेतृत्व को फीडबैक दिया। अमेरिका को उम्मीद थी कि इस सप्ताह डील फाइनल हो जाएगी, लेकिन अंतिम समय में ईरान के इनकार ने इस पूरी कोशिश को बड़ा झटका दे दिया।

क्या होंगे इसके असर?

  • मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है
  • अमेरिका-ईरान परमाणु समझौता और टल सकता है
  • पाकिस्तान की कूटनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं
  • क्षेत्रीय राजनीति में नए गठजोड़ बन सकते हैं

ईरान का इस्लामाबाद बैठक से दूरी बनाना सिर्फ एक कूटनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि भरोसे की कमी का संकेत है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या कोई नया मध्यस्थ सामने आता है या फिर अमेरिका और ईरान सीधे बातचीत का रास्ता अपनाते हैं। फिलहाल, पाकिस्तान की पहल को बड़ा झटका लगा है और क्षेत्रीय राजनीति में अनिश्चितता बढ़ गई है।

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