
हैदराबाद: जिस उम्र में ज्यादातर छात्र अपने करियर की दिशा तय करने में जुटे होते हैं, उसी उम्र में हैदराबाद के रोहन नायडू ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसे उनके आसपास के लोग जोखिम भरा मान सकते थे। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी, देश से बाहर जाने का फैसला किया और सिंगापुर के एक ऐसे कॉलेज में दाखिला लिया, जिसका तब कोई पुराना बैच तक नहीं था। करीब दो दशक बाद यही फैसला उनकी पहचान की सबसे बड़ी वजहों में शामिल हो गया है। अंतरिक्ष के रहस्यों को समझने वाले युवा खगोलशास्त्री रोहन नायडू अब ‘ब्लैक होल स्टार’ से जुड़ी एक हैरान करने वाली खोज के कारण चर्चा में हैं।
हैदराबाद में पले-बढ़े रोहन नायडू के सामने भी करियर का एक अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्ता था-इंजीनियरिंग की पढ़ाई और उसके बाद एक स्थिर करियर। लेकिन उनकी दिलचस्पी हमेशा आसमान और ब्रह्मांड के रहस्यों में रही। महज 18 साल की उम्र में उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़ दिया और सिंगापुर के येल-NUS कॉलेज के शुरुआती बैच में शामिल हो गए। यह उस संस्थान का पहला बैच था, इसलिए वहां न पुराने छात्र थे और न ही पहले से स्थापित अकादमिक पहचान। एक भारतीय छात्र के लिए इतनी कम उम्र में देश छोड़कर एक नए और अनिश्चित संस्थान का हिस्सा बनना बड़ा जोखिम था। लेकिन नायडू ने इसी रास्ते को चुना।
येल-NUS में पढ़ाई के दौरान रोहन नायडू को खगोल विज्ञान के क्षेत्र में काम करने का मौका मिला। उन्होंने चिली के एंडीज पर्वतों में स्थित एक वेधशाला से ब्लेजर्स का अध्ययन किया। यहीं से ब्रह्मांड को समझने की उनकी वैज्ञानिक यात्रा और गहरी होती गई। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 2022 में हार्वर्ड से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। लेकिन उनका लक्ष्य सिर्फ दूर की आकाशगंगाओं को देखना नहीं था। वह ब्रह्मांड के उन पुराने निशानों को समझने में जुटे थे, जिनसे उसके विकास की कहानी को दोबारा जोड़ा जा सके।
रोहन नायडू की वैज्ञानिक पहचान केवल उनकी हालिया खोज तक सीमित नहीं है। ब्लैक होल स्टार से जुड़ी चर्चा से पहले भी वह एक महत्वपूर्ण खगोलीय खोज के कारण सुर्खियों में आ चुके हैं। उन्होंने उस टीम का नेतृत्व किया जिसने उस समय तक देखी गई सबसे दूर की आकाशगंगाओं में से एक की पहचान की थी। इस आकाशगंगा से निकली रोशनी बिग बैंग के लगभग 280 मिलियन साल बाद की बताई गई। इस तरह उनकी रिसर्च लगातार ब्रह्मांड के शुरुआती दौर की ओर पहुंचती रही—वह समय जब आज दिखाई देने वाली कई संरचनाएं अपने शुरुआती रूप में थीं।
नायडू ने हमारी अपनी आकाशगंगा मिल्की वे के बाहरी और धुंधले हिस्सों का भी अध्ययन किया है। उनका काम उन प्राचीन तारों और आकाशगंगाओं के अवशेषों को समझने से जुड़ा रहा है, जिन्हें समय के साथ मिल्की वे ने अपने भीतर समाहित कर लिया। वह पुराने तारों को ब्रह्मांड के ‘जीवाश्म’ की तरह देखते हैं। इन तारों में मौजूद तत्व वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि शुरुआती ब्रह्मांड से लेकर आज की आकाशगंगाओं और ग्रहों तक की यात्रा कैसे हुई।
James Webb finds a BLACK HOLE STAR — a black hole hidden inside a glowing ball of gas roughly as wide as the distance from the Sun to Pluto
It appeared just 660 million years after the Big Bang and may explain the mysterious red dots the telescope keeps spotting in deep space pic.twitter.com/Mf0xiAlDpz— RTBreaking (@RT_Breaking) August 17, 2026
आज रोहन नायडू MIT से जुड़े हैं और युवा खगोलविदों में उनकी गिनती हो रही है। वह James Webb Space Telescope जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से ब्रह्मांड के शुरुआती दौर और दूर की आकाशगंगाओं का अध्ययन कर रहे हैं। उनका सफर इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत किसी स्थापित अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान से नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत एक ऐसे युवा के फैसले से हुई थी, जिसने 18 साल की उम्र में इंजीनियरिंग का सुरक्षित रास्ता छोड़कर अनिश्चित विकल्प चुना।
रोहन नायडू की कहानी का एक और दिलचस्प पहलू है। विज्ञान के अलावा उन्हें कविता, क्विज और ट्रिविया में भी रुचि है। वह एक प्रकाशित कवि हैं और टेस्ट क्रिकेट के प्रशंसक भी हैं। शायद यही वजह है कि उनकी वैज्ञानिक भाषा भी केवल आंकड़ों और तकनीकी शब्दों तक सीमित नहीं रहती। वह ब्रह्मांड को एक तरह की पुरातात्विक खोज के रूप में देखते हैं-जहां पुराने तारों और आकाशगंगाओं के निशान अरबों साल पुरानी कहानी के सुराग बन जाते हैं।
रोहन नायडू की पहचान सिर्फ उस वैज्ञानिक के तौर पर करना आसान है, जिसने ‘ब्लैक होल स्टार’ से जुड़ी खोज में योगदान दिया। लेकिन उनकी कहानी का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी खोज से पहले शुरू हो चुका था। वह 18 साल का वह छात्र था, जिसने तय करियर पथ को छोड़ने का साहस किया। जिसने ऐसे कॉलेज को चुना, जिसकी अपनी कोई स्थापित परंपरा नहीं थी। और जिसने अपनी रुचि पर भरोसा करते हुए खगोल विज्ञान की दुनिया में कदम रखा। आज हैदराबाद से शुरू हुआ वही सफर ब्रह्मांड के सबसे पुराने और रहस्यमय हिस्सों तक पहुंच चुका है। रोहन नायडू की कहानी शायद यही बताती है कि कभी-कभी जिस रास्ते को दुनिया जोखिम समझती है, वही रास्ता किसी ऐसी मंजिल तक ले जा सकता है, जिसे बाकी लोग अभी देख भी नहीं पा रहे होते।
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