Mount Elbrus World Record: जहां सांस लेना भी मुश्किल वहां 24 घंटे टिके हरियाणा के रोहताश

Published : Jan 22, 2026, 03:35 PM ISTUpdated : Jan 22, 2026, 05:06 PM IST
Rohtash Khileri

सार

Mount Elbrus World Record: हरियाणा के रोहताश खिलेरी ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस पर बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के 24 घंटे बिताकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। 5,642 मीटर की ऊंचाई पर यह कारनामा वैज्ञानिकों के लिए भी हैरान करने वाला है। 

Indian Mountaineer Rohtash Khileri World Record: हरियाणा के रोहताश खिलेरी नेयूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (5,642 मीटर) पर बिना किसी ऑक्सीजन सपोर्ट के पूरे 24 घंटे बिताकर एक ऐतिहासिक वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। माउंट एल्ब्रुस पर चढ़ाई करना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती माना जाता है, लेकिन रोहताश खिलेरी ने सिर्फ चोटी को छूकर लौटने की बजाय वहां लंबे समय तक टिके रहने का फैसला किया। यही जज्बा उन्हें दुनिया की नजरों में ला दिया है।

रोहताश खिलेरी का वर्ल्ड रिकॉर्ड

माउंट एल्ब्रुस पर 24 घंटे बिना ऑक्सीजन सपोर्ट रहना ही उनके रिकॉर्ड को बेहद खास बनाती है। हाई-एल्टीट्यूड फिजियोलॉजी पर काम करने वाले वैज्ञानिक इसे एक रियल लाइफ एंड्योरेंस टेस्ट मान रहे हैं। रिसर्च बताती है कि ऐसे हालात में इंसानी शरीर तीन बातों पर निर्भर करता है, जिसमें सही तरीके से ऑक्सीजन का यूज, रेड ब्लड सेल्स की बढ़ी हुई संख्या और एनर्जी की काफी ज्यादा बचत शामिल है।

रिकॉर्ड के बाद रोहताश खिलेरी ने क्या कहा?

रिकॉर्ड बनाने के बाद रोहताश खिलेरी ने सोशल मीडिया के जरिए अपने इमोशन शेयर किए। उन्होंने इसे 8 साल की एक पागल-सी लगने वाली जर्नी बताया, जो आखिरकार पूरी हुई। इस सफर में उन्हें पहले फ्रॉस्टबाइट जैसी गंभीर परेशानियां भी झेलनी पड़ीं, लेकिन उनका फोकस कभी नहीं डगमगाया। रोहताश अपनी इस सफलता का क्रेडिट कड़ी ट्रेनिंग, डिसिप्लिन और उन लोगों को देते हैं जिन्होंने हर हाल में उनका साथ दिया।

 

 

बिना ऑक्सीजन इतनी ऊंचाई पर रहना क्यों खतरनाक?

वैज्ञानिक मानते हैं कि ऊंचाई पर लंबे समय तक रहना, तेज चढ़ाई करके वापस आ जाने से कहीं ज्यादा जोखिम भरा होता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, ऑक्सीजन की कमी बढ़ती जाती है। शरीर को रिकवरी का मौका नहीं मिलता और एक-एक मिनट भारी पड़ने लगता है। सबसे बड़ा खतरा शारीरिक नहीं,मानसिक होता है। लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी से सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होने लगती है। गलत फैसले लेने का खतरा बढ़ जाता है और यही स्थिति सबसे ज्यादा जानलेवा साबित हो सकती है।

जहां हवा पतली होती है और समय धीमा पड़ जाता है

5,000 मीटर से ऊपर पहुंचते ही शरीर सामान्य तरीके से काम करना बंद कर देता है। हवा में ऑक्सीजन समुद्र तल की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत रह जाती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है, शरीर तेजी से गर्मी खोने लगता है और छोटी-सी हरकत भी थका देती है। ठंड, तेज हवा और डिहाइड्रेशन मिलकर दिमाग को धुंधला कर देते हैं। ऐसे हालात में माउंट एल्ब्रुस पर सिर्फ खड़े रहना भी उतना ही खतरनाक होता है, जितना चढ़ाई करना।

 

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