बेवफाई के बाद खौफनाक साजिश, सोते हुए पति पर फेंका तेजाब, उम्रकैद तक पहुंची कहानी

Published : Jun 01, 2026, 11:01 PM IST
sambhal acid attack wife gets life imprisonment for throwing acid on husband

सार

Sambhal Acid Attack Case: संभल एसिड अटैक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी पत्नी को क्या सजा सुनाई है? पीड़ित मुजफ्फर अली पर तेजाब हमला कब और किन परिस्थितियों में किया गया था? अदालत के फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने आगे क्या कानूनी कदम उठाने की बात कही है?

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से सामने आए एक दिल दहला देने वाले एसिड अटैक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसकी राशि पीड़ित को दी जाएगी। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि विश्वासघात, हिंसा और एक व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल देने वाले अपराध की कहानी बन गया है।

एक रात जिसने हमेशा के लिए बदल दी जिंदगी

संभल के सदर कोतवाली क्षेत्र के बदायूं दरवाजा इलाके में 7 मार्च 2025 की रात हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। पीड़ित मुजफ्फर अली ने कथित तौर पर अपनी पत्नी कहकंशा को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इस घटना के बाद घर में तनाव का माहौल बन गया। आरोप है कि उसी रात जब मुजफ्फर अली सो रहे थे, तब उनकी पत्नी कहकंशा ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। अचानक हुए इस हमले से मुजफ्फर अली गंभीर रूप से झुलस गए और उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

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छह महीने चला इलाज, फिर भी नहीं लौटी आंखों की रोशनी

तेजाब के हमले से मुजफ्फर अली का चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। सबसे गंभीर असर उनकी आंखों पर पड़ा, जिसके कारण उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। इसके अलावा तेजाब के छींटों से उनके कंधे और पेट का हिस्सा भी प्रभावित हुआ। घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगभग छह महीने तक चले इलाज और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उनकी दृष्टि वापस नहीं लौट सकी। इस हादसे ने उन्हें शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक स्तर पर भी गहरा आघात पहुंचाया।

एक साल चली सुनवाई, 10 बार हुई अदालत में पेशी

मामले की सुनवाई अपर जनपद न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गोपाल (एचजेएस) की अदालत में चली। करीब एक वर्ष से अधिक समय तक चले न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कुल 10 सुनवाइयां हुईं। अदालत ने 27 मई 2026 को आरोपी कहकंशा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 351(2), 124(1), 109(1) और 118(2) के तहत दोषी करार दिया था। इसके बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। सोमवार को अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा और 1.75 लाख रुपये के आर्थिक दंड से दंडित किया।

पीड़ित को मिलेगी जुर्माने की राशि

अदालत द्वारा लगाए गए 1.75 लाख रुपये के जुर्माने की राशि पीड़ित मुजफ्फर अली को प्रदान की जाएगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में आर्थिक सहायता पीड़ित के पुनर्वास और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। आरोपी की अधिवक्ता पिंकी शर्मा ने बताया कि वे इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की तैयारी करेंगे। उनका कहना है कि बचाव पक्ष को मामले में पर्याप्त समय नहीं मिला, जिसके आधार पर आगे कानूनी चुनौती दी जाएगी।

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