
Sanjay Raut Statement: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत पहुंचने के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन के सामने सख्त रुख अपनाने की मांग की है। राउत ने कहा कि पीएम मोदी को शी जिनपिंग से साफ शब्दों में लद्दाख और गलवान के उन इलाकों से पीछे हटने को कहना चाहिए, जिन पर भारत चीन की घुसपैठ का आरोप लगाता रहा है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय राउत ने भारत-चीन वार्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच करीब 25 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों में कितना सुधार हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।
राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को भारत दौरे पर आए चीनी राष्ट्रपति से सबसे पहले लद्दाख और गलवान के मुद्दे पर बात करनी चाहिए और भारत की जमीन वापस करने की मांग करनी चाहिए।
संजय राउत ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान की भारत यात्रा की भी चर्चा की। उन्होंने पेज़ेश्कियान के भारत पहुंचने को महत्वपूर्ण बताते हुए ईरान की ताकत और आत्मसम्मान की तारीफ की।
राउत ने अमेरिका और चीन पर निशाना साधते हुए दोनों देशों को कारोबारी मानसिकता वाला बताया। उन्होंने कहा कि ईरान ने इजरायल और अमेरिका के सामने अपनी ताकत और हिम्मत दिखाई है, जबकि चीन और अमेरिका अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। दिल्ली पहुंचने पर उनका सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ स्वागत किया गया।
शी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और CPC केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक Cai Qi तथा चीनी विदेश मंत्री Wang Yi भी शामिल हैं।
BRICS Summit के दौरान शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और हाल के वर्षों में रहे तनाव के बीच यह बैठक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संजय राउत के बयान के बाद इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है। अब देखना होगा कि BRICS मंच पर भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच किन मुद्दों पर बातचीत होती है।
BRICS उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग का प्रमुख मंच बन चुका है। इसके एजेंडे में विकास, वित्त, व्यापार, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे मुद्दे शामिल हैं।
समूह को ग्लोबल साउथ के हितों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने वाले महत्वपूर्ण मंच के तौर पर भी देखा जाता है। ऐसे में भारत में हो रहा BRICS Summit न सिर्फ आर्थिक बल्कि कूटनीतिक लिहाज से भी काफी अहम है।
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