
नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सप्तधारा’ का जिक्र कर ‘विकसित भारत@2047’ के लिए एक नया विजन सामने रखा। ‘सप्तधारा’ यानी सात धाराएं-ऐसी सात ताकतें, जिन्हें भारत की आर्थिक, तकनीकी, रणनीतिक और सांस्कृतिक क्षमता को नई ऊंचाई देने का आधार बताया गया। लेकिन ‘सप्तधारा’ सिर्फ सात सेक्टरों की सूची नहीं है। इसके पीछे भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच, ‘सप्त सिंधु’ की अवधारणा और आधुनिक भारत की विकास जरूरतों को जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
‘सप्तधारा’ दो शब्दों से मिलकर बना है-‘सप्त’ यानी सात और ‘धारा’ यानी प्रवाह। भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में सात अंक का विशेष महत्व रहा है। सप्तर्षि, सप्त सिंधु, सात पवित्र नदियां और हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में सात लोक इसके प्रमुख उदाहरण हैं। पद्म पुराण में ‘सप्तधारा-तीर्थ’ का उल्लेख मिलता है, जिसे पवित्र जल की सात धाराओं से जोड़ा गया है। हरिद्वार से जुड़ी स्थानीय मान्यता में भी कहा जाता है कि गंगा सात धाराओं में विभाजित हुई ताकि सप्तऋषि बिना बाधा तपस्या कर सकें। यानी ‘सात धाराओं’ का विचार केवल आधुनिक राजनीतिक या आर्थिक शब्दावली नहीं है। इसका संबंध लंबे समय से पवित्र प्रवाह, निरंतरता और शक्ति के विस्तार की अवधारणा से रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ‘सप्त सिंधु’ यानी सात नदियों की प्राचीन अवधारणा को याद किया। उन्होंने कहा कि एक समय भारत की पहचान और शक्ति ‘सप्त सिंधु’ के जरिए दिखाई देती थी। इसी प्रतीक को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अब विकसित भारत के लिए ताकत की नई धाराओं की जरूरत है। यहीं से ‘सप्तधारा’ का आधुनिक अर्थ सामने आता है। यह किसी एक सरकारी योजना या मंत्रालय का नाम नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय ताकत के सात प्रमुख क्षेत्रों का रणनीतिक ढांचा है।
‘सप्तधारा’ की पहली धारा मैन्युफैक्चरिंग पावर है। PM मोदी ने जोर दिया कि भारत को सिर्फ तैयार उत्पाद बनाने वाला देश नहीं, बल्कि पूरी मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन में मजबूत होना होगा। उन्होंने लागत, गुणवत्ता और पैमाने को वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कुंजी बताया। लक्ष्य भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का भरोसेमंद हिस्सा बनाने के साथ-साथ दुनिया के लिए एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में स्थापित करना है।
PM Modi says that in the coming five to seven years, what could not be achieved in the last five to seven decades will be achieved through the prowess and power of this Sapta Dhara, giving the nation "new heights, new momentum, and the capability to surpass new goals." pic.twitter.com/KVn11RKp8e
— WION (@WIONews) August 15, 2026
दूसरी धारा कृषि और फूड प्रोसेसिंग है। इसमें सिर्फ उत्पादन बढ़ाने के बजाय कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर है। मिलेट्स, मसाले, फल और सब्जियों जैसे भारतीय उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड बनाने की दिशा में आगे बढ़ाने की बात की गई। PM मोदी ने केमिकल-मुक्त खेती और वैश्विक मानकों के अनुरूप कृषि उत्पाद तैयार करने पर भी जोर दिया।
तीसरी धारा है टेक्नोलॉजी और इनोवेशन। UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अनुभव को आधार बनाकर भारत को अगली पीढ़ी की तकनीकों में नेतृत्व करने का लक्ष्य रखा गया। डेटा सेंटर, रोबोटिक्स, उभरती तकनीक और मेड-इन-इंडिया 6G जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया। मकसद साफ है—भारत केवल विदेशी तकनीकों का बाजार न रहे, बल्कि तकनीक विकसित करे और दुनिया को निर्यात भी करे।
चौथी धारा गति शक्ति है। इसमें हाई-स्पीड रेल, हाईवे, एयरपोर्ट, पोर्ट, इनलैंड वॉटरवे और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स जैसी कनेक्टिविटी शामिल है। इसके पीछे लक्ष्य केवल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स की लागत और समय कम करके भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है।
पांचवीं धारा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और आत्मनिर्भर डिफेंस है। PM मोदी ने बदलते वैश्विक हालात के बीच रणनीतिक आत्मनिर्भरता की जरूरत बताई। ड्रोन, काउंटर-ड्रोन और अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों में घरेलू क्षमता विकसित करने के साथ भारत को ग्लोबल डिफेंस सप्लायर बनाने का लक्ष्य रखा गया।
छठी धारा ग्रीन इकोनॉमी और ब्लू इकोनॉमी को जोड़ती है। ग्रीन इकोनॉमी में रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वहीं ब्लू इकोनॉमी भारत की समुद्री क्षमता, तटरेखा, मछली पालन, समुद्री गतिविधियों और तटीय पर्यटन पर केंद्रित है। यानी विकास के साथ ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री क्षमता को भी रणनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश है।
सप्तधारा की आखिरी धारा शायद सबसे अलग है-भारत की सॉफ्ट पावर। योग, हस्तशिल्प, फिल्म, VFX, एनीमेशन, गेमिंग, डिजिटल कंटेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों के जरिए भारत की सांस्कृतिक ताकत को वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव में बदलने की बात की गई। इसका अर्थ यह है कि भारत की ताकत सिर्फ फैक्ट्रियों, तकनीक या सेना तक सीमित नहीं होगी। भारतीय संस्कृति, क्रिएटिव इंडस्ट्री और पर्यटन भी वैश्विक प्रभाव का माध्यम बनेंगे।
PM मोदी ने ‘सप्तधारा’ को विकसित भारत@2047 के बड़े लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि आने वाले पांच से सात साल बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की बात करते हुए सिस्टम, सोच और काम करने की गति में बदलाव की जरूरत बताई। उनका जोर इस बात पर रहा कि जो काम पिछले कई दशकों में पूरे नहीं हो सके, उन्हें आने वाले वर्षों में तेज गति से पूरा किया जाए। यही वजह है कि ‘सप्तधारा’ को केवल सात घोषणाओं के तौर पर देखना अधूरा होगा। इसके जरिए मैन्युफैक्चरिंग से लेकर खेती, टेक्नोलॉजी से डिफेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर से ग्रीन-ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर तक भारत की ताकत के अलग-अलग क्षेत्रों को एक साझा विकास दृष्टि में जोड़ने की कोशिश की गई है।
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