CBSE Examination System : 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद समीति के सामने ऐसी क्या रिपोर्ट रखी जो मोदी सरकार ने CBSE के अध्यक्ष और सचिव को पद से हटा दिया? कौन हैं सार्थक सिद्धांत? CBSE के OSM सिस्टम का कौन सा सच आया सामने? क्या है पूरा मामला CBSE केस?
CBSE Tender Controversy : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया- कार्यप्रणाली पर चल रहे विवाद को लेकर मंगलवार को केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया। सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव को हटा दिया है। बता दें कि 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने आज संसद की स्थायी समिति के सामने सारा सच बताते हुए फैक्ट रखे, जिसके बाद मोदी सरकार ने दोनों ही अधिकारियों को हटाने के आदेश जारी किए।
सार्थक ने पेश की धांधली पर अपनी रिसर्च
बता दें कि 12वीं क्लास के छात्र सार्थक सिद्धांत सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से प्रभावित छात्रों में से एक हैं। उन्होंने कमेटी के सामने इस सिस्टम को लागू करने और टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित धांधली पर अपनी रिसर्च पेश की।
सार्थक ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया।
यह कमेटी CBSE की 12वीं की परीक्षाओं में OSM सिस्टम के इस्तेमाल और छात्रों की तरफ से मूल्यांकन और पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों की समीक्षा कर रही है।
बैठक से पहले, सार्थक ने आरोप लगाया कि CBSE के कई टेंडर डॉक्यूमेंट्स की तुलना करने पर ढेरों गड़बड़ियां सामने आईं. उनके मुताबिक, ऐसा लगता है कि ये बदलाव एक खास सर्विस प्रोवाइडर को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे।
17 साल के सार्थक सिद्धांत मूल रूप से रांची के रहने वाले हैं। जो टेक रिसर्चर हैं, सार्थक खुद एक पीड़ित हैं उन्होंने परीक्षा दी थी।
सार्थक सिद्धांत ने बताया कैसे सामने लाए यह काला सच?
मीडिया से बात करते हुए सार्थक ने कहा, "इसमें कई गड़बड़ियां थीं. मैंने सिर्फ उनकी तुलना की है। मेरे ब्लॉग के मुताबिक, कम से कम 15 गड़बड़ियां थीं। मैं उनमें से तीन-चार को हाईलाइट करना चाहूंगा."
सार्थक ने OSM सिस्टम के टेंडर की शर्तों में हुए बदलावों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने दावा किया कि खराब परफॉर्मेंस, ब्लैकलिस्टिंग, फाइनेंशियल क्वालिफिकेशन लिमिट, CMMI लेवल और प्रोजेक्ट एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया से जुड़े क्लॉज को एक के बाद एक टेंडर में बदल दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया, "पहली गड़बड़ी यह है कि पुराने टेंडर में खराब परफॉर्मेंस को लेकर तीन क्लॉज थे, कि अगर सर्विस प्रोवाइडर का प्रदर्शन खराब रहा तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा. लेकिन नए RFP में इसे पूरी तरह से हटा दिया गया."
छात्र ने बताया कि उन्होंने यह रिसर्च एथिकल हैकर निसर्ग अधिकारी और इस मामले की जांच कर रहे पत्रकारों के साथ मिलकर की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले से सरकारी खरीद और शिक्षा में मूल्यांकन के सिस्टम में और ज्यादा पारदर्शिता आएगी।
बड़े पैमाने पर इसकी टेस्टिंग होनी चाहिए
सार्थक ने यह भी साफ किया कि वह OSM सिस्टम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि इसे लागू करने से पहले और बड़े पैमाने पर इसकी टेस्टिंग होनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि OSM एक अच्छा बदलाव है, लेकिन पहले इसे बड़े स्तर पर रोलआउट करना चाहिए था और अच्छे डेमो पायलट करने चाहिए थे."
यह संसदीय पैनल 9वीं और 10वीं क्लास में थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की भी समीक्षा कर रहा है।
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