
मुजफ्फरनगर: कभी सफेद जर्सी पहनकर रणजी ट्रॉफी के मैदान पर देश के दिग्गज क्रिकेटरों के साथ गेंदबाजी करने वाला खिलाड़ी, कैसे देश के सबसे बड़े अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का गुर्गा और एक खूंखार दरिंदा बन गया? यह कहानी है मुजफ्फरनगर के पचैंडा गांव के रहने वाले सतपाल उर्फ सत्तू की। सोमवार देर रात मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम के साथ बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास हुई एक मुठभेड़ में सत्तू को मार गिराया गया। तितावी क्षेत्र की एक मासूम किशोरी के अपहरण और बलात्कार के मामले में पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश कर रही थी। चार राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके इस 50 वर्षीय अपराधी के मारे जाने के बाद कई सनसनीखेज सच सामने आए हैं।
सतपाल सत्तू की जिंदगी की शुरुआत ऐसी नहीं थी। वह एक प्रतिभावान क्रिकेटर था और 1996 में मोहाली व जालंधर में दो बार रणजी क्रिकेट प्रतियोगिता खेल चुका था। उसने भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी युवराज सिंह के साथ भी मैच खेले थे। हालांकि, उसका गुस्सा और आपराधिक प्रवृत्ति शुरुआत से ही दिखने लगी थी, जब उसने युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह पर ही जानलेवा हमला कर दिया था।
मुजफ्फरनगर एसपी सिटी अमृत जैन ने किया फुल एनकाउंटर,
सतपाल उर्फ सत्तू पुलिस मुठभेड़ मै हुआ ढेर
आरोपी सतपाल छोटा राजन गैंग सदस्य था, क्रिकेटर युवराज सिंह पर हमले का आरोपी भी था बदमाश,
नाबालिग लड़कियों को किडनैप कर रेप किया करता था आरोपी,@muzafarnagarpol@Uppolice @IPSAmrit_Jain pic.twitter.com/ZB00OTnawh— Rishabh Bhardwaj (@newsrishabh1) June 23, 2026
सत्तू ने राजनीति में भी कदम रखा और साल 2007 में वह चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद चुना गया। लेकिन, सफेदपोश राजनीति की आड़ में उसका आपराधिक साम्राज्य बढ़ता गया। 2010 में धागे से लदे ट्रक को लूटने के जुर्म में वह मेरठ जेल पहुंचा। जेल की सलाखों के पीछे से ही उसने मुंबई के कुख्यात छोटा राजन गैंग से हाथ मिला लिया। इसके बाद वह मुजफ्फरनगर, मेरठ और चंडीगढ़ की जेलों में ट्रांसफर होता रहा।
साल 2024 में जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद सत्तू ने प्रतिशोध की एक और खौफनाक कहानी लिखी। उसने अपनी पत्नी के प्रेमी को झांसा देकर चंडीगढ़ के समराला थाना क्षेत्र में बुलाया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी। इस मर्डर केस में वह लुधियाना जेल भेजा गया। जेल के भीतर भी वह बेहद शातिर चालें चलता था। एक बार उसने जेल प्रशासन और कैदियों को गुमराह करने के लिए बैरक में मिठाई बंटवा दी कि उसकी बेटी यूपी में एसडीएम (SDM) बन गई है, जो कि पूरी तरह झूठ था। इसके बाद वह गंभीर बीमारी का नाटक करने लगा। इसी नाटक के दम पर 6 फरवरी 2026 को जब उसे लुधियाना के सिविल अस्पताल ले जाया गया, तो वह पुलिस कस्टडी को चकमा देकर फरार हो गया। फरार होने के बाद उसने चंडीगढ़ के मेयर पर फायरिंग की और मेरठ के व्यापारियों से रंगदारी मांगनी शुरू कर दी।
जेल से भागने के बाद सत्तू ने सहारनपुर से एक कार लूटी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में अपना ठिकाना बदल-बदल कर रहने लगा। उसने अपना नाम बदलकर 'अनिकेत फौजी' रख लिया था और एक फर्जी पहचान पत्र भी तैयार करवा लिया था। वह रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और धार्मिक स्थलों पर मजबूर और नौकरी की तलाश करने वाले परिवारों को अपना निशाना बनाता था। खुद को सेना का अधिकारी बताकर वह गरीब परिवारों को सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देता था।
उसका शिकार करने का तरीका बेहद खौफनाक था:
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि वह मुख्य रास्तों के बजाय जंगल के रास्तों से भागता था और हथियार के बल पर किशोरियों के साथ सामूहिक दरिंदगी करता था। वह केवल कीपैड वाला छोटा मोबाइल इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस उसे ट्रैक न कर पाए।
सत्तू के जुर्म का घड़ा सोमवार रात को भर गया। एसएसपी और एसपी सिटी अमृत जैन के नेतृत्व में पुलिस की संयुक्त टीम ने रामपुर तिराहे पर एक संदिग्ध कार को रोकने का इशारा किया। कार सवार सत्तू ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी और बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन की तरफ भागा। इस फायरिंग में एसओजी (SOG) के दरोगा अजय गौड़ और सिविल लाइन थाने के सिपाही अंकित घायल हो गए, जबकि पुलिस की गाड़ी पर भी गोलियां लगीं।
पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें सत्तू के दोनों पैरों में गोलियां लगीं और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस उसे तुरंत जिला अस्पताल और फिर निजी अस्पताल ले गई, जहां मंगलवार दोपहर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके पास से लूटी गई कार, एक पिस्टल, फर्जी पहचान पत्र, नकदी और अपहृत किशोरी के जेवर बरामद हुए हैं। चार राज्यों और 10 जनपदों में हत्या, लूट और बलात्कार के 24 संगीन मामलों के आरोपी का अंत आखिरकार पुलिस की गोलियों से हुआ।
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