
नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती और कानूनी दांव-पेंच के इतिहास में शुक्रवार, 29 मई का दिन सबसे बड़े ड्रामे का गवाह बना। जब देश की स्टार पहलवान विनेश फोगाट शनिवार से शुरू होने वाले एशियन गेम्स ट्रायल्स के लिए मैट पर उतरने की तैयारी कर रही थीं, ठीक उसी वक्त देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में उनके भविष्य को लेकर एक तीखी और सस्पेंस से भरी बहस चल रही थी। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने विनेश को ट्रायल्स में शामिल होने की हरी झंडी दिखाई थी।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आखिरी समय पर ट्रायल्स की प्रक्रिया में रुकावट न डालने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया, जिससे विनेश को राहत मिल गई, लेकिन इस राहत के साथ कोर्ट ने जो सख्त और तीखी टिप्पणियां कीं, उसने पूरे खेल जगत में खलबली मचा दी है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि WFI की चयन नीति को “भेदभावपूर्ण” कहना, तब उचित नहीं लगता जब पात्रता नियम सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होते हैं। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि न्यायिक हस्तक्षेप केवल भावनात्मक या सीमित आधारों पर नहीं किया जा सकता, खासकर खेल प्रशासन जैसे तकनीकी क्षेत्र में।
सुनवाई में “देश सबसे पहले” की भावना बार-बार सामने आई। कोर्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को हर चयन और पात्रता नियम का पालन करना ही होगा। साथ ही, विनेश फोगाट की उपलब्धियों को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने उन्हें विश्व स्तरीय खिलाड़ी बताया, लेकिन नियमों से ऊपर किसी को नहीं रखा जा सकता, यह भी स्पष्ट कर दिया।
अदालत ने एंटी-डोपिंग नियमों के पालन पर गंभीर सवाल उठाए। रिकॉर्ड्स के अनुसार, फोगाट द्वारा कुछ डोपिंग टेस्ट मिस किए जाने और “व्हेयरअबाउट्स” जानकारी में देरी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों में बार-बार उल्लंघन गंभीर परिणाम दे सकते हैं और चयन प्रक्रिया में बाधा बन सकते हैं।
विवाद की जड़ WFI की नई चयन नीति रही, जिसमें कुछ विशिष्ट टूर्नामेंट और पात्रता शर्तें अनिवार्य की गई थीं। फोगाट ने मातृत्व अवकाश के बाद वापसी पर खुद को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह नीति अनुभवी खिलाड़ियों के लिए दरवाजे बंद कर देती है, जबकि WFI का कहना है कि नियम सभी के लिए समान हैं।
कानूनी बाधा हटने के बाद अब पूरा ध्यान ट्रायल्स पर है। विनेश फोगाट को अपनी योग्यता साबित करने का अवसर मिलेगा, लेकिन यह मामला सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रहेगा। मातृत्व, चयन नीति और खेल प्रशासन की पारदर्शिता पर चल रही बहस आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।
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