
गंगटोक/नामची: सिक्किम के नामची जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। सोमवार की दोपहर करीब 1 बजे, जब समरडुंग में NHPC तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक निर्माणाधीन टनल में रोजाना की तरह काम चल रहा था, अचानक एक भयानक औद्योगिक हादसा हो गया। संदिग्ध मीथेन गैस के जोरदार धमाके के बाद टनल का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस भीषण त्रासदी में कम से कम 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 अन्य मजदूर पिछले 24 घंटे से भी ज्यादा समय से टनल के अंदर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
इस भयावह हादसे के पीछे का कारण बेहद चौंकाने वाला और खौफनाक है। NHPC (नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, टनल की खुदाई के दौरान चट्टानों के अंदर सालों से बंद संदिग्ध मीथेन गैस अचानक भारी दबाव के साथ बाहर निकल आई। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, हवा में फैली इस ज्वलनशील गैस में एक भयंकर धमाका हो गया। धमाका इतना भीषण था कि टनल की पूरी संरचना हिल गई और भारी मलबा नीचे आ गिरा। टनल के मुहाने बंद हो गए और अंदर काम कर रहे करीब 25 मजदूर व कुछ प्रोजेक्ट अधिकारी वहीं दफन हो गए। इस धमाके के कारण टनल के भीतर चारों तरफ घना, काला धुआं और बेहद जहरीली गैसें फैल गईं, जिससे अंदर फंसे लोगों को संभलने या सांस लेने का मौका तक नहीं मिला।
An unfortunate incident occurred at 1:04 PM on July 20, 2026, inside the under-construction Head Race Tunnel (HRT) of NHPC Teesta Stage-VI Hydroelectric Project, Samardung, South Sikkim, after sudden burst of suspected methane gas trapped/embedded inside the rocks which led to… pic.twitter.com/xiTxofNyv9
— NHPC Limited (@nhpcltd) July 21, 2026
नामची के पुलिस अधीक्षक (SP) सोनम डी भूटिया ने इस दर्दनाक हादसे की पुष्टि करते हुए बताया, "टनल के अंदर फंसे कुल 25 लोगों में से 20 की मौत की पुष्टि हो चुकी है।" घटना के बाद से ही युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। कई रेस्क्यू एजेंसियों की कड़ी मशक्कत के बाद अब तक मलबे से 12 शव बाहर निकाले जा चुके हैं। प्रशासन के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती शवों की शिनाख्त करना है। भयंकर मलबे और गैस के प्रभाव के कारण शव क्षत-विक्षत हो चुके हैं। अब तक केवल 7 शवों की ही पहचान हो सकी है, जबकि बाकी बचे शवों की पहचान के प्रयास लगातार जारी हैं। राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने नामची जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि रंगपो में मृतकों की पहचान के लिए एक विशेष और त्वरित व्यवस्था की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को भटकाना न पड़े।
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इस खूनी त्रासदी के बीच अभी भी उम्मीद की एक बेहद पतली डोर बाकी है। टनल के सबसे भीतरी हिस्से में अभी भी 5 मजदूर फंसे हुए हैं, जो पिछले 24 घंटों से ज्यादा समय से वहां घिरे हैं। उनके पास समय बहुत कम है और टनल के अंदर जहरीली गैसों का गुबार है। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव रवींद्र तेलंग ने पुलिस महानिदेशक अक्षय सचदेवा की मौजूदगी में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में जिला प्रशासन, NHPC और सिविल निर्माण कार्य कर रही कंपनी 'पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड' के अधिकारी शामिल हुए। मुख्य सचिव ने रेस्क्यू टीमों को निर्देश दिया है कि टनल के भीतर उपलब्ध ऑक्सीजन सप्लाई का बेहद समझदारी और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल किया जाए ताकि फंसे हुए 5 लोगों तक हवा पहुंचाई जा सके और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
Namchi, Sikkim: The Samardung tunnel incident at Mamring in South Sikkim was caused by a methane gas explosion during excavation, rather than a landslide as initially reported. The resulting gas leak hampered rescue efforts. Ten bodies have been recovered, and NDRF teams continue… pic.twitter.com/rppvq3pPWa
— IANS (@ians_india) July 21, 2026
सिक्किम की इस टनल के भीतर रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद जटिल और जानलेवा साबित हो रहा है। ऐसे में पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से एक बेहद आधुनिक और अनुभवी 'विशेष माइनिंग रेस्क्यू टीम' को समरडुंग बुलाया गया है। यह टीम कोयला खदानों और तंग टनल में रेस्क्यू करने में माहिर है और अब सिक्किम की एजेंसियों के साथ मिलकर मलबे को हटाने में जुट गई है। इस आपदा की गूंज देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंची है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तुरंत सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग से फोन पर बात कर हालात की पूरी जानकारी ली। केंद्र सरकार ने सेना और एनडीआरएफ सहित हर संभव मदद भेजने का भरोसा दिया है। इस त्रासदी के सम्मान में सिक्किम विधानसभा ने भी अपनी कार्यवाही के दौरान दो मिनट का मौन रखकर मृत कर्मचारियों को श्रद्धांजलि दी।
इस मुश्किल घड़ी में प्रभावित परिवारों, खासकर दूसरे राज्यों से आए प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए सरकारों ने अपने खजाने खोल दिए हैं। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्य सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और हर घायल व्यक्ति को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने NHPC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूपेंद्र गुप्ता को कड़े निर्देश दिए हैं कि कंपनी के स्तर पर भी पीड़ितों को मिलने वाला मुआवजा बिना किसी प्रशासनिक देरी के जल्द से जल्द जारी किया जाए। हादसे के कारणों की गहन जांच के लिए एक विशेष उच्च-स्तरीय जांच समिति का भी गठन कर दिया गया है।
NHPC की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, चट्टानों के भीतर फंसी संदिग्ध मीथेन गैस अचानक बाहर निकली, जिससे विस्फोट हुआ। धमाके के बाद सुरंग में घना धुआं और जहरीली गैस भर गई, जिससे बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी। राज्य सरकार ने घटना के कारणों की विस्तृत जांच के लिए विशेष समिति गठित करने की घोषणा की है।
सिक्किम विधानसभा में हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया। राज्य सरकार ने रंगपो में मृतकों की पहचान के लिए विशेष व्यवस्था करने और दूसरे राज्यों से आए पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। गवर्नर ओम प्रकाश माथुर और मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों से राहत कार्य की समीक्षा की तथा NHPC को पीड़ित परिवारों तक शीघ्र मुआवजा पहुंचाने के निर्देश दिए।
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