
Sonam Wangchuk: शिक्षा सुधारों और NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में चल रहा आंदोलन अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। ऑनलाइन व्यंग्यात्मक आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के समर्थन में 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रख्यात एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार (18 जुलाई) को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटा दिया गया था। सरकार ने उन्हें तुरंत सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया, जिसके बाद यह पूरा मामला एक कानूनी और सियासी कुरुक्षेत्र में तब्दील हो गया। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि उनके पति को बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी के, गैर-कानूनी तरीके से सरकारी अस्पताल में कैद करके रखा गया है।
मंगलवार (21 जुलाई) को दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत के भीतर का माहौल बेहद तनावपूर्ण था। रविवार को सिंगल जज बेंच की जस्टिस मिनी पुष्करणा ने वांगचुक को कहीं और ट्रांसफर करने से साफ इनकार कर दिया था, जिससे सरकार के हौसले बुलंद थे। लेकिन मंगलवार को डिवीजन बेंच के सामने याचिकाकर्ता की दलीलें इतनी पुख्ता थीं कि सरकार को भी बैकफुट पर आना पड़ा। अदालत में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अचानक कहा कि सरकार को सोनम वांगचुक को सफदरजंग से हटाकर देश के प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पताल 'मेदांता' में शिफ्ट करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
#WATCH | Activist Sonam Wangchuk’s wife, Dr Gitanjali Angmo, says, "I thank Delhi High Court for favourably disposing of this matter. In India, a democratic citizen has the right to choose his choice of doctor and hospital and treatment. Here, we had trust deficit because of the… pic.twitter.com/CfhhCkZJYM
— ANI (@ANI) July 21, 2026
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने अपनी अपील में एक बेहद गंभीर और बुनियादी मानवाधिकार का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दलील दी कि सफदरजंग अस्पताल में उनके पति को रखने का पिछला आदेश असल में एक नागरिक से उसके इलाज के बारे में फैसला लेने का अधिकार ही छीन लेता है। याचिका में साफ कहा गया कि कानून में "जानकारी के साथ सहमति" (informed consent) या किसी भी मेडिकल ट्रीटमेंट को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार हर नागरिक को है, जिसे इस मामले में पूरी तरह कुचल दिया गया था। कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एम्स के इंचार्ज डायरेक्टर और इमरजेंसी डॉक्टरों को भी तलब किया था, साथ ही वांगचुक की प्राइवेट लैब से कराई गई ब्लड एनालिसिस रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड पर लिया।
ये भी पढ़ें….जंतर-मंतर की तस्वीरें देख टूटा सोनाक्षी सिन्हा का दिल, बोलीं -
दोपहर के भोजन के बाद ठीक 2:30 बजे जैसे ही कोर्ट की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, जजों ने अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक को तुरंत मेदांता हॉस्पिटल शिफ्ट करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने एक बेहद सख्त शर्त भी जोड़ी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के तर्कों को स्वीकार करते हुए अदालत ने साफ किया कि वांगचुक पूरी तरह मेडिकल देखरेख में रहेंगे और मेदांता के डॉक्टरों के विशेष पैनल की सलाह और मंजूरी के बिना उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया जा सकेगा। मेदांता को उनके इलाज के लिए डॉक्टरों का एक विशेष पैनल गठित करने और सफदरजंग की सभी मेडिकल रिपोर्ट्स को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया गया है।
Delhi: Activist Sonam Wangchuk's wife, Gitanjali J. Angmo, says, "Sonam has decided to continue his hunger strike because of the cruelty and ruthlessness with which the students were treated. They were beaten, lathi-charged, and tear gas was used against them. In solidarity with… pic.twitter.com/GAz0QZMNBd
— IANS (@ians_india) July 21, 2026
यह फैसला सीजेपी (CJP) के उस बड़े आंदोलन के बीच आया है जो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। इस अदालती आदेश ने वांगचुक और उनके समर्थकों को एक बहुत बड़ी राहत दी है, लेकिन अब यह देखना बाकी है कि मेदांता के डॉक्टरों की देखरेख में वांगचुक की सेहत और इस आंदोलन का भविष्य क्या रुख अख्तियार करता है।
इससे पहले विशेष सुनवाई के दौरान एकल पीठ ने सफदरजंग अस्पताल में चल रहे इलाज में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने माना था कि उस समय एक्टिविस्ट को तत्काल किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं है और सरकार द्वारा जंतर-मंतर से सरकारी अस्पताल ले जाने के फैसले को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
ये भी पढ़ें… किसी को घसीटा तो किसी को आए चक्कर, 8 PHOTO में देखें सपा कार्यकर्ताओं से पुलिस की भिडंत
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।