
Congress Vande Mataram Row: 15 अगस्त 2026 के जश्न के बीच कांग्रेस मुख्यालय (Congress Headquarters) से सामने आए एक वीडियो ने देश में नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक 31 सेकेंड का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) और कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन को रोकने का इशारा करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और बीजेपी हमलावर है।
यह विवादित वीडियो स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय का है। वीडियो में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद हैं। जैसे ही कार्यक्रम में 'वंदे मातरम' (Vande Mataram) का गायन चल रहा होता है, कैमरे में कैद फुटेज के मुताबिक, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे अपने आस-पास मौजूद लोगों को हाथ से इशारा करते हैं। जिसके बाद कहा जाने लगा कि यह इशारा राष्ट्रगीत के गायन या उसे बजाए जाने को रोकने के लिए किया गया। कुछ ही पलों के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी बिल्कुल वैसा ही इशारा करते हुए कैमरे में कैद हुए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद आलोचकों ने कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रगीत का अपमान करने और इसे लेकर असहज होने का गंभीर आरोप लगाया है।
Rahul Gandhi aspires to be Indian PM,
Leave being PM, first he should try to be an Indian along with his family members.
Immediately after Vande Mataram started to play
- his mother Sonia Gandhi got angry and openly asked to stop it
- Rahul himself intervened and asked to… pic.twitter.com/SVy97C7Xe1— Cons of Congress (@ConsOfCongress) August 15, 2026
विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस ने आरोपों को खारिज किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। यानी पार्टी का दावा है कि वीडियो में दिख रहा इशारा राष्ट्रीय गीत को रोकने से जुड़ा नहीं था। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाया जाता रहा है। उन्होंने 1937 में कांग्रेस के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल, जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आजाद जैसे नेताओं की मौजूदगी में शुरुआती अंतरों को लेकर निर्णय लिया गया था।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर सियासत कोई नई बात नहीं है। आधिकारिक और सार्वजनिक समारोहों में इसके पूरे संस्करण को गाने को लेकर पहले भी राजनीतिक घमासान मचता रहा है।
पीएम मोदी का प्रहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अतीत में कांग्रेस पर आरोप लगा चुके हैं कि पार्टी ने ऐतिहासिक रूप से राष्ट्रगीत को छोटा कर दिया और केवल इसके शुरुआती दो छंदों को ही बरकरार रखा। हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान भी पीएम मोदी ने आजादी से पहले 'वंदे मातरम' के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताने को लेकर कांग्रेस की तीखी आलोचना की थी।
150 साल का इतिहास
बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा 1875 में रचित और 'आनंदमठ' में शामिल 'वंदे मातरम' भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे शक्तिशाली नारा था। इस साल लाल किले पर पीएम मोदी के समारोह में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत बजाया गया, जो इसकी विरासत के 150 साल पूरे होने का भी प्रतीक है।
केरल में भी छिड़ा है विवाद
यह नया विवाद ऐसे वक्त में हुआ है, जब केरल की कांग्रेस नीत सरकार ने स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने और राष्ट्रगान (जन गण मन) गाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन 'वंदे मातरम' गाने का कोई जिक्र नहीं किया है। इसे लेकर भी बीजेपी ने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया था।
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