सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुनवाई, गिरफ्तारी का खतरा या राजनीतिक टकराव?

Published : Apr 30, 2026, 04:48 PM IST
Supreme Court Hears Pawan Kheras Bail Plea in Defamation Case Linked to Assam CMs Wife

सार

Supreme Court Hears Pawan Kheras Bail Plea: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। असम CM हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर बयान को लेकर विवाद बढ़ा, हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब SC के फैसले पर नजर।

Supreme Court Hears Pawan Khera’s Bail Plea in Defamation Case: देश की शीर्ष अदालत में गुरुवार को एक ऐसा मामला सुनवाई के लिए आया, जिसने सियासी बयानबाजी, कानूनी दलीलों और संवैधानिक मर्यादा, तीनों को एक साथ चर्चा के केंद्र में ला दिया। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की, जिसमें असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर दिए गए बयान से जुड़ा मानहानि मामला शामिल है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब गुहाटी हाई कोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई।

कोर्ट में तीखी बहस, “गिरफ्तारी का वास्तविक खतरा”

पवन खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में जोरदार दलीलें रखते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को “वास्तविक और विश्वसनीय गिरफ्तारी का खतरा” है। सिंघवी ने कहा कि यह मामला असामान्य है और इसमें राजनीतिक बयानबाजी का असर साफ दिखता है। उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की भाषा किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर मामला मानहानि का है, तो गिरफ्तारी की जरूरत क्यों पड़ रही है। “अगर अग्रिम जमानत ऐसे मामलों में नहीं मिलेगी, तो इसका उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा,” उन्होंने कोर्ट से कहा।

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सरकार का पलटवार: फर्जी दस्तावेज और विदेशी कनेक्शन का आरोप

वहीं असम सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह केवल मानहानि का मामला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा ने “फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेज तैयार कर मुख्यमंत्री की पत्नी को बदनाम करने की कोशिश की।” उन्होंने कहा कि किसी सरकारी मुहर का फर्जी इस्तेमाल बेहद गंभीर अपराध है और इसकी गहन जांच के लिए कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है। मेहता ने यह भी सवाल उठाया कि इस पूरे मामले में “विदेशी तत्वों” की भूमिका क्या है और किन लोगों ने कथित दस्तावेज तैयार करने में मदद की।

पहली बार बचाव पक्ष ने मानी संभावित गलती

सुनवाई के दौरान एक अहम मोड़ तब आया जब अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वीकार किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान “कुछ त्रुटि हो सकती है।” हालांकि उन्होंने इसे अधिकतम मानहानि का मामला बताया और गिरफ्तारी को गैर-जरूरी करार दिया।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी शर्मा पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। खेड़ा ने दावा किया था कि उनके पास विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद असम पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और मामला कोर्ट तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कथित “फर्जी दस्तावेजों” के स्रोत का पता लगाने के लिए कस्टोडियल जांच जरूरी है। इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई।

अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला अहम

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब नजर इस बात पर है कि कोर्ट पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से राहत देता है या जांच एजेंसियों को खुली छूट मिलती है। यह मामला सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का भी संकेत देता है। एक ओर विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ रहा है, तो दूसरी ओर सरकार इसे गंभीर आपराधिक आरोपों का मामला बता रही है। आने वाला फैसला न केवल पवन खेड़ा की कानूनी स्थिति तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि राजनीतिक बयानबाजी और कानून की सीमाएं कहां तय होती हैं।

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