सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शादीशुदा महिला ‘शादी के झूठे वादे’ पर रेप केस क्यों नहीं कर सकती?

Published : Feb 06, 2026, 08:06 AM IST

Supreme Court Verdict: क्या शादीशुदा महिला “शादी के झूठे वादे” के आधार पर रेप का केस कर सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने रिश्तों, सहमति और कानून की सीमाओं पर खींची साफ लकीर। क्या यह फैसला कानून के दुरुपयोग पर लगाम है या नए सवालों की शुरुआत?

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Married Woman Rape Case Supreme Court Verdict: सुप्रीम कोर्ट की एक अहम टिप्पणी ने एक बार फिर “शादी के झूठे वादे पर रेप” जैसे मामलों को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। देश की शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर महिला पहले से शादीशुदा है, तो वह किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ यह कहकर रेप का दावा नहीं कर सकती कि उससे शादी का वादा किया गया था। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब सहमति से बने रिश्तों के टूटने के बाद रेप के मामले दर्ज होने पर अदालतें लगातार चिंता जता रही हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा कि यह मामला एक ऐसे रिश्ते का है जो पूरी तरह सहमति से बना था, लेकिन बाद में बिगड़ गया। कोर्ट ने इसे “सहमति से बने रिश्ते के कड़वे होने का क्लासिक मामला” बताया। कोर्ट का कहना था कि जब शिकायतकर्ता महिला पहले से शादीशुदा थी, तब वह कानूनी रूप से शादी करने के योग्य ही नहीं थी। ऐसे में वह यह नहीं कह सकती कि आरोपी ने उससे शादी का झूठा वादा किया।

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शादीशुदा महिला शादी के वादे का दावा क्यों नहीं कर सकती?

सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(1) का हवाला दिया। इस धारा के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति का पति या पत्नी जीवित है, तो वह दूसरी शादी नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि जब कोई वादा कानूनन संभव ही नहीं है, तो उस वादे के टूटने को रेप का आधार नहीं बनाया जा सकता। यानी, जो वादा कानूनी रूप से लागू ही नहीं हो सकता, उस पर आपराधिक मामला नहीं बनता।

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क्या हर टूटा रिश्ता रेप का मामला बन सकता है?

यह सवाल आज सबसे ज़्यादा पूछा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का जवाब साफ है-नहीं। कोर्ट ने कहा कि आज के समय में क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। इसलिए अदालतों को यह देखना होगा कि क्या यौन संबंध सहमति से बने थे? क्या शुरुआत से ही धोखे की मंशा थी? या फिर यह सिर्फ रिश्ता टूटने के बाद लिया गया कदम है?

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इस केस में FIR क्यों रद्द की गई?

यह मामला एक महिला वकील द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने एक पुरुष वकील पर शादी के झूठे वादे पर रेप का आरोप लगाया था। लेकिन कोर्ट ने पाया कि महिला पहले से शादीशुदा थी, रिश्ता सहमति से बना था, जिसकी वजह से शादी का वादा कानूनी रूप से संभव नहीं था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

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असली रेप मामलों को लेकर कोर्ट ने क्या चेतावनी दी?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि आज कानून के गलत इस्तेमाल को देखते हुए अदालतों को बेहद सावधान रहना होगा। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि असली रेप के मामलों और रिश्ते टूटने के बाद दर्ज मामलों के बीच फर्क करना बहुत ज़रूरी है, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके।

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