
गाजीपुर (उत्तर प्रदेश). दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम से एक परिवार 132 साल बाद अपने पुरखों की तलाश में गाजीपुर आया है। जॉन मोहनलाल रामनंदनलाल और शारदा रामनंदनलाल ने अपने 70 साल के पिता का जिंदगी भर का सपना पूरा करने के लिए गाजीपुर के खानपुर गांव और वाराणसी का दौरा किया। इस परिवार ने अपने पूर्वजों का पता लगाने और वंशावली की वैज्ञानिक जांच के लिए ज्ञान लैब में प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे को अपने डीएनए सैंपल भी दिए हैं।
ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिसर्च के मुताबिक, इस परिवार के पूर्वज रामनंदन और उनकी पत्नी राजवंतिया यूपी में गाजीपुर जिले के सैदपुर थाने के तहत आने वाले खानपुर गांव के रहने वाले थे। उस समय रामनंदन की उम्र सिर्फ 24 साल थी और उनके पिता का नाम होरोपुरसाद (हरि प्रसाद) था। वहीं, राजवंतिया 22 साल की थीं और उनके पिता का नाम बरम चारीलाल था। यह कपल कायस्थ समुदाय से ताल्लुक रखता था। ये दोनों 25 अगस्त 1894 को कलकत्ता से एक ब्रिटिश जहाज 'एम्स' (Ames) में बैठकर गिरमिटिया मजदूर के तौर पर सूरीनाम (पारामारिबो) के लिए निकले थे।
इस जहाज में करीब 400 से 500 अन्य यात्री भी सवार थे। समंदर में 89 दिनों के लंबे और मुश्किल सफर के बाद, वे 22 नवंबर 1894 को पारामारिबो पहुंचे। वहां पहुंचने पर उन्हें निकेरी जिले के 'वाटरलू' बागान में काम पर रखा गया। सूरीनाम में बसने और अपना कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने के बाद, रामनंदन और राजवंतिया ने 20 दिसंबर 1911 को आधिकारिक तौर पर शादी कर ली। इतिहास में दर्ज है कि उनके बेटे जयकरम ने 15 अक्टूबर 1934 को 'रामनंदनलाल' सरनेम अपनाया था। आज की पीढ़ी भी इसी सरनेम का इस्तेमाल कर रही है।
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