
TCS Hiring 2026: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS)-भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता और देश के लाखों युवाओं के सपनों का ठिकाना। करीब एक साल पहले, यह कंपनी एक ऐसी रहस्यमयी पहेली बन चुकी थी जिसने पूरे कॉर्पोरेट जगत की नींद उड़ा दी थी। हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा था: क्या भारत में IT नौकरियों का सुनहरा दौर हमेशा के लिए खत्म हो चुका है? लेकिन आज, हवाओं का रुख बदल चुका है। FY27 की अप्रैल-जून तिमाही में TCS ने अचानक 9,279 नए कर्मचारियों को जोड़कर सबको चौंका दिया है। तीन साल से भी ज़्यादा समय में यह कंपनी की सबसे बड़ी तिमाही छंटनी नहीं, बल्कि 'नेट बढ़ोतरी' है। आइए परत-दर-परत समझते हैं कि बंद दरवाजों के पीछे चल क्या रहा है।
कहानी की शुरुआत होती है सितंबर 2025 की उस तिमाही से, जिसने भारतीय IT इतिहास को हिलाकर रख दिया। TCS ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए एक झटके में 19,755 कर्मचारियों की कमी दिखाई। डर अभी थमा भी नहीं था कि दिसंबर 2025 की तिमाही में 11,151 और कर्मचारी कंपनी का साथ छोड़ गए। बाजार में अटकलों का बाजार गर्म हो गया। क्या यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का पहला हमला था? क्या ग्लोबल क्लाइंट्स ने भारतीय इंजीनियर्स से मुंह मोड़ लिया था? हर कोई इसे 'महा-छंटनी' (Mass Layoff) मान चुका था।
जब चौतरफा दबाव बढ़ा, तब अक्टूबर 2025 में TCS के चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर सुदीप कुन्नुमल ने मौन तोड़ा। उन्होंने जो कहा, उसने इस रहस्य को और गहरा कर दिया। कंपनी किसी तय छंटनी लक्ष्य पर काम नहीं कर रही थी। तो फिर ये हजारों लोग कहां गए? दरअसल, पर्दे के पीछे एक साइलेंट फिल्टर चल रहा था। अपनी मर्जी से इस्तीफा देने वाले, परफॉर्मेंस मैनेजमेंट के तहत बाहर होने वाले, और सबसे दिलचस्प-वे कर्मचारी जिन्हें कंपनी ने रीस्किलिंग और ट्रेनिंग तो दी, लेकिन वे बदलती बिज़नेस ज़रूरतों के सांचे में फिट नहीं हो सके। यह सामान्य छंटनी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी 'सफाई' थी।
हालात रातों-रात नहीं बदले, लेकिन जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में एक खामोश बदलाव आया। TCS ने चुपके से 2,356 कर्मचारियों की बढ़ोतरी दर्ज की। यह इस बात का पहला संकेत था कि तूफ़ान अब थम रहा है। और फिर आया जून 2026 का क्वार्टर, जहां 9,279 नए चेहरों की एंट्री ने साबित कर दिया कि TCS वापस अपने ट्रैक पर लौट आई है। कंपनी ने इसी तिमाही में करीब 14,000 फ्रेशर्स को भी कैंपस से उठाया, जिसने युवाओं में फिर से उम्मीद जगा दी है।
अक्सर नौकरियां तब जाती हैं जब धंधा मंदा होता है, लेकिन TCS के मामले में गणित उल्टा था। जून तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट 5% बढ़कर 13,349 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, और रेवेन्यू 14% की छलांग लगाकर 72,275 करोड़ रुपये हो गया। इतना ही नहीं, कंपनी के पास 9.5 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम ऑर्डर बुक मौजूद है। इसमें SKF के साथ 800 मिलियन डॉलर का AI-आधारित ट्रांसफ़ॉर्मेशन डील और यूरोप की एक फॉर्च्यून ग्लोबल 50 कंपनी के साथ हुआ महा-कॉन्ट्रैक्ट शामिल है। ब्रोकरेज फर्म JM फाइनेंशियल ने भी स्टॉक पर "Add" रेटिंग बरकरार रखी है। साफ़ है कि कंपनी कमजोर नहीं हो रही थी, बल्कि खुद को एक बड़े दांव के लिए तैयार कर रही थी।
अब बात करते हैं उस सबसे बड़े 'विलेन' या 'हीरो' की, जिसने यह पूरा खेल रचा है-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)। लोगों को लगा था AI नौकरियां खा जाएगा, लेकिन यहां कहानी में ट्विस्ट है। TCS की नई रणनीति यह है कि पारंपरिक रोल (Traditional Roles) को धीरे-धीरे खत्म या री-लोकेट किया जा रहा है, जबकि AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट्स को हाथों-हाथ लिया जा रहा है। यही वजह है कि एक तरफ पुराने ढर्रे के लोग बाहर जा रहे थे और नए स्किल्स वाले लोग अंदर आ रहे थे।
TCS ने यह साबित कर दिया है कि महामारी के दौर जैसी 'अंधाधुंध मास हायरिंग' (Mass Hiring) अब कभी वापस नहीं आएगी। अब मुकाबला केवल डिग्री का नहीं, बल्कि 'स्पेशलाइज्ड स्किल्स' का है। अगर आप खुद को समय के साथ री-स्किल नहीं करेंगे, तो IT की इस नई रेस में पीछे छूट जाएंगे। TCS का यह यू-टर्न भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नई सुबह का संकेत है, लेकिन नए नियमों के साथ!
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