क्या पक्षी भी एयरोडायनेमिक्स के नियम जानते हैं? वैज्ञानिक तो 'हां' कहते हैं। इसका सबसे बड़ा सबूत है आसमान में 'V' शेप बनाकर उड़ते पक्षियों का झुंड। चलिए जानते हैं इसके पीछे की साइंस।
आपने आसमान में पक्षियों के झुंड को उड़ते देखा होगा। वे एक खास पैटर्न में उड़ते हैं, जो अक्सर अंग्रेजी के 'V' अक्षर जैसा दिखता है। यह खूबसूरत नजारा सिर्फ अनुशासन नहीं, बल्कि इसके पीछे एक कमाल का वैज्ञानिक राज (Science) छिपा है। खासकर हजारों किलोमीटर का सफर करने वाले प्रवासी पक्षी इसी फॉर्मेशन को क्यों चुनते हैं... आइए जानते हैं।
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‘एयरोडायनेमिक्स’ का कमाल!
प्रवासी पक्षी हवा के दबाव को कम करने के लिए 'V' शेप में उड़ते हैं। वे हवा को चीरकर तेजी से आगे बढ़ने के लिए 'एयरोडायनेमिक्स' का पालन करते हैं। झुंड में सबसे आगे उड़ने वाला लीडर पक्षी हवा को काटता है और बाकी पक्षियों के लिए मेहनत कम कर देता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इसी साइंस की वजह से पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय कर पाते हैं। आगे वाला पक्षी जब पंख फड़फड़ाता है, तो उसके पंखों के सिरों से हवा ऊपर उठती है, जिसे 'अपवॉश' (Upwash) कहते हैं। पीछे वाला पक्षी इसी 'अपवॉश' में खुद को सेट कर लेता है, जिससे उसे उड़ने में कम ताकत लगानी पड़ती है।
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पक्षियों की एनर्जी बचाने का सीक्रेट
वैज्ञानिकों की रिसर्च के मुताबिक, अकेले उड़ने की तुलना में 'V' शेप में उड़ने से पक्षी करीब 70% तक एनर्जी बचा लेते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस फॉर्मेशन में उड़ते समय पक्षियों के दिल की धड़कन (Heart rate) भी काफी कम रहती है। वे कम पंख फड़फड़ाते हैं और हवा में तैरते हुए (Gliding) आगे बढ़ते हैं, जिससे शरीर पर बोझ कम पड़ता है। इसीलिए उनकी हार्ट रेट कम हो जाती है।
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पक्षियों का टीमवर्क है लाजवाब
'V' शेप में सबसे आगे वाले पक्षी पर हवा का दबाव सबसे ज्यादा होता है, इसलिए वह जल्दी थक जाता है। जैसे ही लीडर पक्षी थकता है, वह पीछे चला जाता है और उसकी जगह कोई दूसरा मजबूत पक्षी ले लेता है। इस तरह झुंड के सभी पक्षी बारी-बारी से लीडर की भूमिका निभाते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। यह बिना किसी स्वार्थ के असली टीमवर्क का बेहतरीन उदाहरण है।
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पक्षियों का कम्युनिकेशन और सपोर्ट सिस्टम
'V' शेप में उड़ने से हर पक्षी अपने आगे वाले पक्षी को साफ-साफ देख पाता है, इसलिए कोई रास्ता नहीं भटकता। अगर कोई पक्षी थकान या चोट की वजह से नीचे गिर जाता है, तो उसकी मदद के लिए दो-तीन और पक्षी भी नीचे उतरते हैं। वे उसके ठीक होने तक उसकी रक्षा करते हैं और फिर किसी दूसरे झुंड के साथ उड़ जाते हैं। प्रकृति के इस इंजीनियरिंग सबक का इस्तेमाल आज मिलिट्री फाइटर जेट्स भी ईंधन बचाने के लिए करते हैं।
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