
बात 1976 की है। जॉर्जिया मेलोनी अपनी मां की कोख में थीं। उनकी मां की पहले से एक बेटी थी और घर में गरीबी इतनी कि दो वक्त की रोटी का भी ठिकाना नहीं था। मां ने सोचा कि जब एक बच्चे को पालना इतना मुश्किल है, तो दूसरा कैसे मुमकिन होगा। इसी सोच के साथ वो गर्भपात कराने के लिए अस्पताल पहुंच गईं। लेकिन आखिरी पलों में न जाने क्या सोचकर उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। शायद तब किसी ज्योतिषी ने भी यह नहीं बताया होगा कि 15 जनवरी, 1977 को जन्मी यही लड़की एक दिन इटली की प्रधानमंत्री बनेगी।
जॉर्जिया मेलोनी के संघर्ष की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जब वो सिर्फ एक साल की थीं, तब उनके पिता परिवार को घोर गरीबी में छोड़कर स्पेन चले गए और वहां दूसरी शादी कर ली। कहते हैं कि जब मुश्किलें आती हैं तो चारों तरफ से आती हैं। शायद एक मूर्ति को भी खूबसूरत बनने के लिए कई चोटें सहनी पड़ती हैं।
मेलोनी की ज़िंदगी में भी कुछ ऐसा ही हुआ। अपनी बहन के साथ खेलते हुए एक ऐसा हादसा हुआ कि उनका पूरा घर आग में जलकर खाक हो गया। पहले से ही खाने के लाले थे, अब तो सिर से छत भी छिन गई। पूरा परिवार नानी के एक बहुत छोटे से घर में रहने लगा। कई-कई दिन बिना खाए भी गुजारे। शायद इसी गरीबी ने मेलोनी के अंदर एक आग जला दी। उन्होंने ठान लिया कि वो ऐसी ज़िंदगी किसी और को नहीं जीने देंगी और एक ऐसा देश बनाएंगी जहां कोई भूखा न सोए। लेकिन पेट की आग बुझाने के लिए उन्होंने हर तरह का काम किया। उन्होंने बार में अटेंडेंट, रेस्टोरेंट में बारमेड, घरों में बेबीसिटर और रोम के मशहूर नाइट क्लबों में काम करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की।
जब मेलोनी सिर्फ 15 साल की थीं, तब उन्होंने देश के लिए कुछ करने की ठानी। यह वो उम्र होती है जब ज़्यादातर बच्चों को दुनिया की समझ नहीं होती। लेकिन मेलोनी ने इटली के कम्युनिस्ट-विरोधी और राष्ट्रवादी 'यूथ फ्रंट' को ज्वाइन कर लिया। अपनी दमदार भाषण कला और हिम्मत की वजह से वह जल्द ही एक स्टूडेंट लीडर बन गईं। उस समय इटली में माफिया और भ्रष्टाचार का बोलबाला था। जज पाओलो बोर्सेलिनो की हत्या ने उन पर गहरा असर डाला और उन्होंने राजनीति में आकर इस माफिया राज को खत्म करने की कसम खाई।
उन्होंने 'फ्रातेली दि'इटालिया' (Brothers of Italy) नाम की पार्टी बनाई, लेकिन शुरुआत में उन्हें सिर्फ हार और अपमान ही मिला। पर मेलोनी ने हार नहीं मानी। उन्होंने महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी। आखिरकार, उनकी मेहनत रंग लाई और उनकी पार्टी को शानदार जीत मिली। 29 साल की उम्र में वह इटली की सांसद बनीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की सरकार में वह युवा कल्याण मंत्री बनीं और इटली के इतिहास में सबसे कम उम्र की मंत्री कहलाईं। 2012 में, मेलोनी ने अपनी पार्टी को 'ब्रदर्स ऑफ इटली' के तौर पर फिर से स्थापित किया। 2022 के आम चुनाव में उनकी पार्टी ने ज़बरदस्त जीत हासिल की और अक्टूबर 2022 में जॉर्जिया मेलोनी ने इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच दिया।
मेलोनी की लिव-इन पार्टनर से एक बेटी है। जब कोई महिला आगे बढ़ती है, तो उसे बदनाम करने वाले भी पीछे नहीं रहते। मेलोनी को नीचा दिखाने के लिए एक पोर्न वेबसाइट पर उनका वीडियो अपलोड कर दिया गया। लेकिन मेलोनी ने वीडियो अपलोड करने वालों को कोर्ट तक घसीटा। बाद में, उन्हें हर्जाने में मिली रकम को उन्होंने घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए दान कर दिया। इस तरह, अकेले दम पर शून्य से साम्राज्य खड़ा करने वाली ये महिला आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दोस्त जॉर्जिया मेलोनी हैं।
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