
Thalapathy Vijay Biography: तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने वर्चस्व को तोड़कर एक नया इतिहास रचने वाले थलपति विजय आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पर्दे पर अपनी दमदार एक्टिंग से करोड़ों दिलों पर राज करने से लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की कुर्सी की ओर कदम बढ़ाने तक का उनका सफर हर किसी को प्रेरित करता है। लेकिन पर्दे पर हमेशा लार्जर देन लाइफ दिखने वाले इस सुपरस्टार की असल जिंदगी में कई ऐसे पन्ने हैं, जिन्हें आम जनता के सामने कभी नहीं खोला गया। आज हम थलपति विजय की जिंदगी के उन्हीं अनसुने और अनकहे किस्सों पर रोशनी डालेंगे।
विजय की जिंदगी का एक बेहद दिलचस्प पहलू उनका बचपन है। आपको यह जानकर शायद हैरानी होगी कि महज छह साल की उम्र में विजय अपने ही माता-पिता की शादी में शामिल हुए थे। दरअसल, विजय के पिता और मशहूर फिल्म निर्देशक एसए चंद्रशेखर एक ईसाई परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जबकि उनकी माता शोभा हिंदू हैं। इन दोनों ने पहले हिंदू रीति-रिवाज से पारंपरिक तरीके से शादी की थी और बाद में ईसाई परंपरा के अनुसार दूसरी बार शादी की। जब यह दूसरी शादी हुई, तब विजय की उम्र लगभग 6 साल थी और वह खुद इस वैवाहिक समारोह का हिस्सा बने थे।
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यह तो कई लोग जानते हैं कि विजय को फिल्मों में उनके पिता एसए चंद्रशेखर ने ही लॉन्च किया था और वे 1984 से 1988 के बीच बाल कलाकार के रूप में भी नजर आ चुके थे। साल 1992 में आई फिल्म 'नालैया थीरपु' से उन्होंने 18 साल की उम्र में बतौर लीड एक्टर डेब्यू किया, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही। इस फिल्म के बाद विजय की इतनी कड़ी आलोचना हुई कि वे निराश होकर पूरी रात रोते रहे थे।
हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी। विजय हमेशा से सुपरस्टार रजनीकांत के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं और उन्होंने खुद माना है कि अगर रजनीकांत नहीं होते तो वह कभी सिनेमा जगत में कदम ही नहीं रखते। दिलचस्प बात यह है कि विजय को एक लीड एक्टर के तौर पर पहला रोल रजनीकांत की हिट फिल्म 'अन्नामलाई' का एक मशहूर डायलॉग बोलने के बाद ही मिला था।
आज राजनीति के मैदान में अपने संतुलित और नपे-तुले बयानों के लिए जाने जाने वाले विजय ने अपने करियर के एक लंबे दौर में मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी थी। उन्होंने लगभग 10 सालों तक कोई भी इंटरव्यू नहीं दिया। इसका कारण एक पुरानी और कड़वी घटना थी।
एक तमिल मैगजीन को दिए गए इंटरव्यू में विजय के जवाबों को पूरी तरह से बदल कर छापा गया था, जिससे उनके बयान काफी अहंकारी नजर आ रहे थे। इस लेख को पढ़ने के बाद उनके दोस्तों और परिवार वालों ने भी उनसे सवाल किए कि उन्होंने इतने घमंड भरे जवाब क्यों दिए। विजय ने अपने परिवार को तो सच्चाई समझा दी, लेकिन हर एक इंसान को सफाई देना उनके लिए संभव नहीं था। इसी घटना से आहत होकर उन्होंने 10 सालों के लिए चुप्पी साध ली और फिर साल 2022 में अपनी फिल्म 'बीस्ट' के दौरान ही दोबारा इंटरव्यू के लिए हामी भरी।
विजय अपनी छोटी बहन विद्या से बेहद प्यार करते थे, लेकिन जब विजय 9 साल के थे, तब उनकी बहन का दुखद निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। अपनी बहन की याद को हमेशा जिंदा रखने के लिए ही उन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम 'वी. वी. प्रोडक्शंस' (विद्या-विजय प्रोडक्शंस) रखा।
शायद इसी गहरे दर्द ने उनके अंदर समाज के प्रति करुणा जगाई। उन्होंने 'विजय मक्कल इयक्कम' नामक संगठन की शुरुआत की। इस संगठन ने 2011 के थाणे तूफान में राहत कार्य करने से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में जरूरतमंद बच्चों की काफी मदद की है। सबसे खास बात यह है कि 2017 के ऐतिहासिक जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन में विजय ने किसी स्टार की तरह नहीं, बल्कि अपने चेहरे पर रुमाल बांधकर एक आम आदमी की तरह गुमनाम रूप से हिस्सा लिया था। इसी जमीनी जुड़ाव और संगठन ने आज उनके राजनीतिक दल 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) की मजबूत नींव रखी है।
50 साल की उम्र में भी गजब की फुर्ती बनाए रखने वाले विजय कोई बहुत फैंसी डाइट नहीं, बल्कि एक बेहद अनुशासित और साधारण दक्षिण भारतीय रूटीन फॉलो करते हैं। वह अपने दिन की शुरुआत दो उबली हुई इडली और नारियल की चटनी के साथ करते हैं। दोपहर के खाने में वे 200 ग्राम ब्राउन राइस, ग्रिल्ड चिकन या मछली और हरी सब्जियां लेते हैं, जबकि रात का खाना बहुत हल्का होता है जिसमें केवल ताजे फलों का सलाद रहता है।
हालांकि, इस सख्त रूटीन के बावजूद उनके भी चीट डेज होते हैं। ऐसे दिनों में उन्हें शेफ मोहम्मद इयक्कम की बनाई मटन बिरयानी और चिकन करी के साथ क्रिस्पी डोसा खाना बहुत पसंद है। इसके अलावा, उनकी मां शोभा चंद्रशेखर के हाथों का बना पारंपरिक मीठा 'सक्करई पोंगल' उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है।
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एक ऐसा बच्चा जिसने अपनी पहली ही फिल्म में असफलता का कड़वा घूंट पीकर रातों की नींद गंवाई, और जिसे मीडिया के सामने अपनी छवि बचाने के लिए 10 साल तक खामोश रहना पड़ा, आज उसी शख्स ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई सुबह का आगाज किया है। थलपति विजय की कहानी सिर्फ एक सिनेमाई स्टार के राजनेता बनने की नहीं है, बल्कि यह उस इंसान के अनदेखे पन्नों की कहानी है जिसने अपने दर्द, अपनी असफलताओं और अपनी खामोशी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।
नोट: ये लेख इंटरनेट पर मौजूद सामान्य जानकारी को पढ़ कर लिखा गया है, एशियानेट हिंदी, किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता।
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