
TMC Congress Merger Rumours: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस के अंदर खींचतान और नेताओं की नाराजगी, बागी होने की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के साथ पार्टी के संभावित विलय की चर्चाओं ने सियासी माहौल गर्म कर दिया था। कहा जाने लगा था कि ममता दीदी की अपनी की पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापसी हो जाएगी, लेकिन कांग्रेस ने इस पूरे सस्पेंस पर ही फुल स्टॉप लगा दिया है। आइए जानते हैं कि टीएमसी-कांग्रेस मर्जर की इनसाइड स्टोरी क्या है, कांग्रेस ने इस पर क्या बड़ा बयान दिया है और क्या यह ममता बनर्जी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका है?
हाल ही में दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक हुई थी। इस बैठक में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी शामिल हुए थे। बैठक के बाद ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मुलाकात की, जबकि अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से अलग बातचीत की। बस यहीं से राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि कहीं TMC और कांग्रेस के बीच कोई बड़ा राजनीतिक फैसला तो नहीं पक रहा। चूंकि बंगाल चुनाव में TMC को बड़ा झटका लगा है और पार्टी के अंदर भी असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं, इसलिए इन अटकलों को और हवा मिल गई।
Our Hon’ble Chairperson Smt @MamataOfficial and our Hon’ble National General Secretaries Shri @abhishekaitc & Shri @derekobrienmp along with Shri @KBanerjee_AITC exchanged views with INDIA Bloc leaders during today’s meeting in Delhi.
A few heartwarming moments from a gathering… pic.twitter.com/YBNRhTjHLR— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) June 8, 2026
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इन तमाम खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि TMC और कांग्रेस के एक होने की बातें सिर्फ और खुद सिर्फ मनगढ़ंत अफवाहें हैं। वेणुगोपाल ने मीटिंग का सच बताते हुए कहा, 'हाल ही में दिल्ली में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ हमारी जो मुलाकात हुई थी, उसमें सिर्फ देश के जरूरी मुद्दों पर बात हुई। संसद और देश के सामने खड़ी समस्याओं को मिलकर कैसे उठाना है, चर्चा सिर्फ इसी पर थी। पार्टी को मर्ज करने (मिलाने) जैसी कोई बात दूर-दूर तक नहीं हुई।'
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के साथ-साथ खुद TMC के अंदर से भी इन अफवाहों का विरोध हो रहा है। TMC नेता ऋतब्रत बनर्जी (जो दावा कर रहे हैं कि पार्टी के 80 में से 64 विधायक उनके साथ हैं) ने इस खबर का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि जब हमारे दो-तिहाई सांसद और विधायक कांग्रेस में जाने को तैयार ही नहीं हैं, तो फिर यह विलय कौन और किससे कर रहा है? वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी के करीबी सांसद सौगत रॉय ने थोड़ा संभलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना तो जरूरी है, लेकिन वह आगे चलकर गठबंधन होगा या विलय, यह अभी देखना बाकी है। TMC के कई अन्य नेताओं ने भी विलय की खबरों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के साथ सहयोग और गठबंधन अलग बात है, लेकिन विलय की चर्चा फिलहाल वास्तविकता से दूर है। यानी दोनों तरफ से संकेत यही मिल रहे हैं कि अभी किसी राजनीतिक विलय की संभावना नहीं दिख रही।
ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती 20 साल से ज्यादा का समय कांग्रेस में ही बिताया था। लेकिन 1997 में कांग्रेस आलाकमान से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और 1998 में अपनी नई पार्टी TMC बनाई थी। अब करीब 29 साल बाद, जब उनकी पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है, तब दोबारा कांग्रेस के साथ उनका नाम जुड़ना राजनीति के बदलते समीकरणों को दिखाता है। फिलहाल के लिए भले ही दोनों पार्टियों ने इस खबर को अफवाह बता दिया हो, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि बंगाल में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए ममता बनर्जी आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ कोई नया और बड़ा दांव खेल सकती हैं।
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