TMC Future: 'पुत्रमोह' में धृतराष्ट्र बनीं ममता दीदी? पार्टी में फूट के बाद अब आगे क्या? 10 बड़ी संभावनाएं

Published : Jun 11, 2026, 04:26 PM IST
TMC Future

सार

West Bengal Politics Possibilities: क्या टीएमसी अब खत्म होने की कगार पर है? अभिषेक बनर्जी को लेकर पार्टी के अंदर इतना विरोध क्यों बढ़ रहा है? क्या बागी सांसद और विधायक नया गुट बना सकते हैं? क्या INDIA गठबंधन में TMC की ताकत घटेगी? पश्चिम बंगाल की राजनीति में आगे क्या-क्या होने वाला है?

TMC Crisis 10 Major Scenarios: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे बवाल के बीच अब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पूरी तरह बिखरती दिख रही है। पार्टी के पुराने वफादार और बागी नेता खुलकर कह रहे हैं कि ममता दीदी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के चक्कर में 'धृतराष्ट्र' बन गई हैं और इसी वजह से पूरी पार्टी बर्बाद हो गई। आलम यह है कि ममता बनर्जी के पास अब विधानसभा में सिर्फ 22 विधायक और लोकसभा में केवल 8 सांसद बचे हैं। इस भारी टूट के बाद हर किसी के जेहन में एक ही सवाल है, अब आगे क्या होगा? आइए समझते हैं कि टीएमसी में अभी क्या चल रहा है और आने वाले दिनों में क्या-क्या 10 बड़ी संभावनाएं बन रही हैं...

बंगाल की राजनीति को हिला देने वाले 4 बड़े झटके

  1. ममता बनर्जी के सबसे खास सांसद कल्याण बनर्जी ने सीधे दीदी को अल्टीमेटम दे दिया है कि 'या तो मेरे साथ रहो या अभिषेक के साथ।' उन्होंने अभिषेक को घमंडी बताते हुए कहा कि उन्हें बड़ों की इज्जत करना नहीं आता है।
  2. राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि 'मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ, आगे-आगे देखिए।' उनसे पहले सुखेंदु शेखर और सुष्मिता देव भी पार्टी छोड़ चुके हैं।
  3. टीएमसी के बागी नेता रिजु दत्ता ने तो यहां तक कह दिया कि 'अभिषेक बनर्जी ऐसा व्यक्ति है जो काउंसलर बनने के लायक भी नहीं था, लेकिन ममता बनर्जी ने धृतराष्ट्र की तरह आंखें बंद कर यहां तक पहुंचा दिया। युवराज (अभिषेक) ने अकेले पूरी पार्टी बर्बाद की, सबका अपना किया और अब समय जेल में चक्की पीसने का आ गया है।'
  4. पूरी लड़ाई की जड़ एक कथित फर्जी हस्ताक्षर मामला है। इसी केस में घिरे अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत नहीं मिली है और उन्हें आज शाम 6 बजे ही कोलकाता के भवानी भवन में CID के सामने पेश होना है।

TMC में अब आगे क्या? क्या 10 बड़ी संभावनाएं बन रही हैं

दल-बदल कानून की अग्निपरीक्षा

नियम कहता है कि बगावत करने वालों के पास कम से कम दो-तिहाई संख्या होनी चाहिए, ताकि उनकी सदस्यता न जाए। बागियों का दावा है कि 80 में से 58 विधायक उनके साथ हैं, जो कि दो-तिहाई से ज्यादा है। अब देखना होगा कि विधानसभा स्पीकर इस पर क्या फैसला लेते हैं।

टीएमसी अभी और टूट सकती है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि राजनीति में जब उगते सूरज को लोग सलाम करते हैं, तो डूबती नाव से सब पहले कूदते हैं। अभी जो विधायक या सांसद शांत बैठे हैं, वे भी हवा का रुख देखकर पाला बदल सकते हैं। जिला स्तर के बड़े नेताओं में भी भगदड़ मच सकती है।

लोकल चुनावों में टीएमसी का सूपड़ा साफ होने का खतरा

पार्टी में जब ऊपर लड़ाई होती है, तो नीचे का कार्यकर्ता सुस्त हो जाता है। आने वाले दिनों में बंगाल में जो भी उपचुनाव या लोकल बॉडी के चुनाव होंगे, वहां टीएमसी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उनका वोट बैंक अब बंट जाएगा।

ममता दीदी का डैमेज कंट्रोल प्लान

जानकार कहते हैं कि, ममता बनर्जी हार मानने वाली नेताओं में से नहीं हैं। वे रूठे हुए नेताओं को मनाने के लिए कोई बड़ा ऑफर दे सकती हैं। मुमकिन है कि वे संगठन से कुछ लोगों को निकालकर नए चेहरों को आगे लाएं ताकि जनता में यह मैसेज जाए कि पार्टी अभी जिंदा है।

बागियों की नई पार्टी या नया गुट

अगर ममता बनर्जी और बागी गुट में समझौता नहीं हुआ, तो बागी नेता एक नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। यह बिल्कुल वैसा ही हो सकता है, जैसा महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ हुआ था।

कोर्ट-कचहरी और कानूनी लड़ाई तेज

अब असली लड़ाई कागजों पर लड़ी जा सकती है। ममता बनर्जी का गुट और बागी गुट, दोनों ही खुद को 'असली टीएमसी' साबित करने के लिए चुनाव आयोग से लेकर अदालतों के चक्कर काट सकते हैं।

तृणमूल के सिंबल पर बवाल

जब पार्टी के दावों को लेकर बवाल मचेगा, तो सबसे बड़ी लड़ाई इस बात की भी होगी कि 'टीएमसी' नाम, उसका झंडा और चुनाव चिह्न किसके पास रहेगा। इस पर ममता बनर्जी गुट का कब्जा रहेगा या बागी गुट इसे छीन ले जाएगा?

बीजेपी सरकार होगी और मजबूत

पश्चिम बंगाल में भाजपा पहले ही सरकार बना चुकी है। अब टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों ने दिल्ली में NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इससे केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर बीजेपी की स्थिति और मजबूत हो जाएगी।

कांग्रेस की भी नजर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ममता बनर्जी भले ही कांग्रेस की चौखट पर दिल्ली में दस्तक दे रही हैं, लेकिन उनकी पार्टी टीएमसी में चल रहे संकट का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कांग्रेस भी कर सकती है, यही वजह है कि उसकी भी नजर इस पर बनी हुई है।

कांग्रेस में टीएमसी का विलय

टीएमसी के सीनियर नेता सौगत रॉय ने एक बहुत बड़ा इशारा किया है कि 'कांग्रेस के साथ काम करना जरूरी है, विलय होगा या गठबंधन, यह आगे देखेंगे।' चूंकि ममता और अभिषेक लगातार सोनिया-राहुल गांधी से मिल रहे हैं, तो मुमकिन है कि वजूद बचाने के लिए टीएमसी वापस कांग्रेस में मिल जाए।

 

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